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इसी हफ्ते लगने वाला है सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, जानें टाइमिंग और जरुरी बातें

PATNA : साल 2021 का आखिरी चंद्रग्रहण इसी हफ्ते लगने वाला है. 19 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण पिछले 600 वर्षों में सबसे लंबे समय का चंद्र ग्रहण है, जिसके का

इसी हफ्ते लगने वाला है सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, जानें टाइमिंग और जरुरी बातें
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PATNA : साल 2021 का आखिरी चंद्रग्रहण इसी हफ्ते लगने वाला है. 19 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण पिछले 600 वर्षों में सबसे लंबे समय का चंद्र ग्रहण है, जिसके कारण खगोलविदों के साथ-साथ मेदिनी ज्योतिष के जानकारों में इसको लेकर विशेष उत्सुकता है. यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा.


बता दें कि कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि को इस बार खंडग्रस्‍तोदित चंद्रग्रहण लग रहा है, जिसे ज्‍योतिष में बेहद अशुभ माना जाता है. यह ग्रहण 19 नवंबर, दिन शुक्रवार को लगेगा. कृत्तिका नक्षत्र, परिघ योग और वृष लग्न में इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण लग रहा है. हालांकि, खंडग्रस्तोदित होने के कारण इसका कोई विशेष धार्मिक महत्व नहीं होगा. ऐसे चंद्रग्रहण में मोक्ष सूक्ष्मता से देखने पर ही दिखाई देता है. 


यह चंद्रग्रहण वृष राशि और कृत्तिका नक्षत्र में होने से ग्रहण का ज्यादा प्रभाव इसी राशि और नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर पड़ेगा. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक चंद्रग्रहण में गंगा स्नान से एक हजार वाजस्नेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. इसीलिए ग्रहण के बाद गंगाजल से स्नान एवं घरों में इसका छिड़काव किया जाता है. 


चंद्रग्रहण का समय काल
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने पंचागों के हवाले से बताया कि इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण दोपहर 12:48 बजे से आरंभ होकर शाम 04:17 बजे खत्म हो जाएगा. वही इस ग्रहण का मध्य दिन दोपहर 02:33 बजे होगा. साल के दूसरे खण्डग्रस्तोदित चंद्रग्रहण की अवधि करीबन 03 घंटे 29 मिनट का रहेगी. 


भारत में यहां दिखेगा चंद्रग्रहण
ज्योतिषों के मुताबिक, यह चंद्रग्रहण भारत की सुदूर पूर्वी सीमा पर दिखेगा. ग्रहण काल में परिस्थितियां ऐसी बनेंगी कि जिस समय ग्रहण का स्पर्श और अंत समय रहेगा, उस समय भारतीय दृश्यकाश से चन्द्रमा दिखाई नहीं देगा, क्योंकि दोपहर का समय रहेगा. ज्योतिषशास्त्र में ऐसे ग्रहण को ग्रस्तोदित ग्रहण माना गया है. भारत के सुदूर पूर्वी क्षितिज या अरुणाचल प्रदेश के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, रूस और चीन में देखा जायेगा ग्रहण जहां दिखाई पड़ता है, उसका फलाफल भी वहीं लगता है.

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