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Shivratri: अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव और माखन श्रृंगार की परंपरा शुरू

शिवरात्रि का पर्व भारत में विशेष महत्व रखता है, और इसे श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के मंडी में स्थित बाबा भूतनाथ मंदिर में हर वर्ष आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का एक विशेष आकर्षण 'माखन श्रृंगार' है।

International Shivratri Festival
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© International Shivratri Festival
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Shivratri: अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के तहत हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी माखन श्रृंगार की परंपरा निभाई जा रही है। इस श्रृंगार में बाबा भूतनाथ की पिंडी को एक माह तक मक्खन से ढका जाता है, जो 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन उतारा जाएगा और भक्तों को प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन होंगे।


इंद्रदमनेश्वर महादेव का स्वरूप

इस क्रम में आज बाबा भूतनाथ की पिंडी को बिहार के लखीसराय जिले में स्थित इंद्रदमनेश्वर महादेव के रूप में सजाया गया है। भक्तजन इस भव्य श्रृंगार के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।


इंद्रदमनेश्वर महादेव का ऐतिहासिक महत्व

इंद्रदमनेश्वर महादेव का इतिहास लगभग चार दशक पुराना है। वर्ष 1977 में लखीसराय जिले के चौकी गांव के दो बच्चों ने खेल-खेल में जमीन में दबे काले पत्थर को देखा। जब गांव वालों ने इसे खोदना शुरू किया, तो यह कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि एक विशाल शिवलिंग निकला।


पाल वंश और इंद्रदमनेश्वर महादेव

पाल वंश कालीन सातवीं-आठवीं शताब्दी के राजा इंद्रदमन, जो भगवान शिव के अनन्य भक्त थे, ने इस शिवलिंग को स्थापित किया था। इसके नाम पर ही इस स्थान का नाम इंद्रदमनेश्वर महादेव पड़ा, जबकि खोजने वाले बालक अशोक के नाम पर इस स्थान को अशोकधाम कहा जाने लगा।


भारत के सबसे विशाल शिवलिंगों में से एक

इंद्रदमनेश्वर महादेव का शिवलिंग भारत के सबसे विशाल शिवलिंगों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि यह भगवान श्रीराम द्वारा भी पूजित रहा है। बिहार-झारखंड विभाजन के बाद अशोकधाम को बिहार के बाबाधाम के रूप में भी जाना जाने लगा। श्रावण मास में लाखों कांवरिए यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। मंदिर के विकास के लिए इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।


मंडी के बाबा भूतनाथ मंदिर में माखन श्रृंगार की परंपरा

मंडी को “छोटी काशी” भी कहा जाता है, और यहां का बाबा भूतनाथ मंदिर सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में माखन श्रृंगार की परंपरा सदियों पुरानी है। भक्तों की आस्था और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में यह परंपरा आज भी जीवंत है और हर वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर इसे विशेष रूप से निभाया जाता है।