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बिना MLA-MLC बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बने दीपक प्रकाश? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब

Deepak Prakash: बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा कि बिना विधायक या विधान पार्षद बने कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे रह सकता है।

Deepak Prakash
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Deepak Prakash: बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि जब दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के, तो वे छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बने रह सकते हैं।



दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान पार्षद नहीं होते हुए मंत्री बनाया जाता है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। दीपक प्रकाश के मामले में इस संवैधानिक प्रावधान के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।



इस मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार से कहा, "यह कानून का शुद्ध प्रश्न है। राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। इसका स्पष्ट स्पष्टीकरण देना होगा।"



सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश के मंत्री बनने के छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वे अब तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं बने हैं।



वहीं, बिहार सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मामला पहले से ही 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। राज्य सरकार ने कहा कि वह इस विषय को न्यायालय के विवेक पर छोड़ती है।



याचिका में आरोप लगाया गया है कि दीपक प्रकाश संविधान के अनुच्छेद 164(4) में निर्धारित छह महीने की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी मंत्री पद पर बने हुए हैं, जबकि वे अब तक राज्य की किसी भी विधायिका के सदस्य नहीं बने हैं।


गौरतलब है कि दीपक प्रकाश, एनडीए सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। उस समय उनका मंत्री बनाया जाना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना था।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता