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'दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है', E20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा तंज

Rahul Gandhi E20 Petrol: ई20 पेट्रोल को लेकर देश में सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इससे वाहनों के इंजन और माइलेज पर असर पड़ रहा है।

Rahul Gandhi E20 Petrol
© Social media
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Rahul Gandhi E20 Petrol: देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार की E20 नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएंगे।



राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे गाड़ियों की उम्र कम हो रही है और माइलेज भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "इस मामले में दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।"



कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति का नुकसान आम जनता और वाहन मालिकों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि E20 पेट्रोल से आम लोगों को क्या लाभ होगा। राहुल गांधी ने इसे "भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा मामला" बताते हुए कहा कि इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।



इससे पहले भी कांग्रेस E20 ईंधन नीति का विरोध कर चुकी है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने इस योजना को जल्दबाजी में लागू किया है और इसके जल संसाधनों तथा खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की अनदेखी की जा रही है।



कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि E20 ईंधन के पर्यावरणीय प्रभाव का सही आकलन तभी संभव है, जब इसके लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के कारण जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले असर का भी मूल्यांकन किया जाए।



उन्होंने दावा किया कि एक लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने से लगभग 3,630 लीटर, चावल से करीब 10,790 लीटर और मक्के से लगभग 4,670 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। जयराम रमेश के अनुसार, ऐसे समय में जब देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, ये आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।



उन्होंने यह भी कहा कि नीति आयोग के वर्ष 2021 के एथेनॉल संबंधी मार्गदर्शी दस्तावेज में अधिक टिकाऊ कच्चे माल की ओर बढ़ने की आवश्यकता स्वीकार की गई थी। कांग्रेस का कहना है कि E20 नीति को लागू करने से पहले इन सभी पहलुओं पर व्यापक और वैज्ञानिक समीक्षा की जानी चाहिए।



वहीं, सरकार का पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है। केंद्र सरकार पहले विभिन्न अवसरों पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन को आयातित तेल पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और उत्सर्जन घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता चुकी है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता