ब्रेकिंग
छात्रों को रोजगार दिलाने के लिए PPU की नई पहल, अब सभी कॉलेजों में अनिवार्य होगा प्लेसमेंट सेललूना सवार को बचाने की कोशिश में गड्ढे में गिरी थी बस, 8 दिन से लापता था चालक; 1 KM दूर मिला शवभागलपुर में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड, NH-80 पर आवागमन पूरी तरह बंद; रेल पुलों के गर्डर तक पहुंचा पानीबिहार के चर्चित RTI एक्टिविस्ट को घर में घुसकर जान से मारने की धमकी, भाजपा नेता के खिलाफ थाने में शिकायत, पुलिस जांच में जुटी...राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका, अदालत ने मानहानि केस को रद्द करने से किया इनकारछात्रों को रोजगार दिलाने के लिए PPU की नई पहल, अब सभी कॉलेजों में अनिवार्य होगा प्लेसमेंट सेललूना सवार को बचाने की कोशिश में गड्ढे में गिरी थी बस, 8 दिन से लापता था चालक; 1 KM दूर मिला शवभागलपुर में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड, NH-80 पर आवागमन पूरी तरह बंद; रेल पुलों के गर्डर तक पहुंचा पानीबिहार के चर्चित RTI एक्टिविस्ट को घर में घुसकर जान से मारने की धमकी, भाजपा नेता के खिलाफ थाने में शिकायत, पुलिस जांच में जुटी...राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका, अदालत ने मानहानि केस को रद्द करने से किया इनकार

राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका, अदालत ने मानहानि केस को रद्द करने से किया इनकार

Rahul Gandhi: राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसी कथित टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए केस रद्द करने से इनकार किया।

Rahul Gandhi
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर ‘चौकीदार चोर है’, ‘चोरों के सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसी टिप्पणियों से जुड़े मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस नितिन बोरकर की एकल पीठ ने मंगलवार को राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।



राहुल गांधी ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की ओर से जारी समन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि कथित बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया गया था और न ही किसी ‘पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग’ को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था।



वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पासबोला ने राहुल गांधी की ओर से दलील देते हुए कहा कि कथित ट्वीट में राहुल गांधी ने बीजेपी या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया। उनका तर्क था कि जब किसी स्पष्ट रूप से पहचान योग्य व्यक्ति या समूह को निशाना नहीं बनाया गया, तो शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं बनता।



कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नितिन बोरकर ने कहा कि बीजेपी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए उसे एक पहचान योग्य संस्था माना जा सकता है।



कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता का दावा है कि वह करीब दो दशक से बीजेपी का सक्रिय सदस्य रहा है। पहली नजर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो बीजेपी के सदस्य हैं, को ‘कमांडर-इन-थीफ’ कहने वाली टिप्पणी को केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित मानना जरूरी नहीं है।हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कथित बयान का वास्तविक आशय क्या था और उसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, इन सवालों का फैसला मुकदमे के दौरान किया जाएगा। इन मुद्दों पर ट्रायल के स्तर पर विचार किया जाना है।



यह मामला बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रिमल की शिकायत पर शुरू हुआ था। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दायर की थी, जिसके बाद राहुल गांधी को समन जारी किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी की टिप्पणी केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इससे बीजेपी और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई। उनका दावा था कि नरेंद्र मोदी को ‘चोरों के सरदार’ कहने से बीजेपी के सदस्यों को भी ‘चोर’ के रूप में पेश किया गया।



राहुल गांधी की याचिका का महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंद साठे ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर कोर्ट को यह देखना होगा कि मानहानि के अपराध के लिए आवश्यक तत्व मौजूद हैं या नहीं और क्या कथित टिप्पणी किसी निश्चित एवं पहचान योग्य समूह से संबंधित थी। उनका तर्क था कि यदि किसी निश्चित और पहचान योग्य समूह की पहचान की जा सकती है, तो कानून के तहत किसी पीड़ित व्यक्ति को अभियोजन शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है। इसलिए इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द नहीं किया जाना चाहिए।



बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता शशि थरूर से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। उस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने माना था कि पंजीकरण के आधार पर किसी राजनीतिक दल को पहचान योग्य और निर्धारित संस्था माना जा सकता है।बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में कथित बयान का वास्तविक आशय और पार्टी के सदस्यों पर उसका प्रभाव जैसे सवाल अभी तय किए जाने बाकी हैं। इनका निर्धारण ट्रायल के दौरान किया जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता