ब्रेकिंग
तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 173 किलोमीटर गहराई में था केंद्र,ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता✦पटना में ब्लिंकिट वेयरहाउस पर बड़ी कार्रवाई, ₹2.13 करोड़ की खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक; 9 to 9 समेत कई स्टोर को भी नोटिस✦बिहार MLC चुनाव से पहले बख्तियारपुर फोरलेन पर 9 लाख कैश बरामद, एक व्यक्ति हिरासत में, पूछताछ जारी ✦महुआ अस्पताल की बदहाली पर सवाल, ऑक्सीजन प्लांट बंद होने का दावा; परिसर में मिलीं शराब की बोतलें✦'बारिश में भीग जाते तो क्या होता?', बंगाल दुर्गा पंडाल भगदड़ पर BJP विधायक का विवादित बयान, लोगों को ठहराया जिम्मेदार✦तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 173 किलोमीटर गहराई में था केंद्र,ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता✦पटना में ब्लिंकिट वेयरहाउस पर बड़ी कार्रवाई, ₹2.13 करोड़ की खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक; 9 to 9 समेत कई स्टोर को भी नोटिस✦बिहार MLC चुनाव से पहले बख्तियारपुर फोरलेन पर 9 लाख कैश बरामद, एक व्यक्ति हिरासत में, पूछताछ जारी ✦महुआ अस्पताल की बदहाली पर सवाल, ऑक्सीजन प्लांट बंद होने का दावा; परिसर में मिलीं शराब की बोतलें✦'बारिश में भीग जाते तो क्या होता?', बंगाल दुर्गा पंडाल भगदड़ पर BJP विधायक का विवादित बयान, लोगों को ठहराया जिम्मेदार

तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र, बिहार में बाढ़ को लेकर कर दी यह बड़ी मांग

Bihar Politics: बिहार में भीषण बाढ़ के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र से तत्काल 5,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की अपील की है।

Bihar Politics
© Google
Mukesh Srivastava
5 मिनट

Bihar Politics: बिहार में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। एक दर्जन से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में हैं और लाखों लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। बिहार सरकार की तरफ से तमाम तरह की कोशिशें की जा रही हैं। इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है और बिहार में आए विनाशकारी बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के साथ ही तत्काल 𝟓 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता राशि के अलावा राज्य को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।



तेजस्वी यादव ने पत्र में लिखा, “बिहार इस समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से गुजर रहा है। इस समय बिहार के 20 जिले बाढ़ जनित आपदा की चपेट में हैं। इस आपदा में फंसे लाखों लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। नदियों में निरंतर बढ़ते जलस्तर से जल ग्रहण क्षेत्र में वृद्धि के कारण सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है तथा हजारों करोड़ के जान-माल की क्षति हुई है। राज्य की बड़ी आबादी भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवा, बिजली आपूर्ति, पशुचारा एवं सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।


देश के सबसे गरीब और पिछड़े राज्य बिहार की एनडीए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही बाढ़ राहत एवं बचाव व्यवस्था ऊँट के मुँह में जीरे के समान है। बिहार में विनाशकारी बाढ़ ने लाखों लोगों का जीवन तबाह कर दिया है, लेकिन बिहार सरकार और बिहार से निर्वाचित NDA के केंद्रीय मंत्री व सांसद बेबस, लाचार, अक्षम और असहाय नजर आ रहे हैं। वो ना तो केंद्र सरकार से इस भीषण बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करा पा रहे हैं और ना ही बिहार के लिए विशेष राहत एवं सहायता राशि की मांग मजबूती से उठा पा रहे हैं।


यह स्थिति केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन के अंतर्गत response, mitigation और adaptation की वर्षों से चली आ रही सतत्त विफलता का भी परिणाम है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ आने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है।


यह अत्यंत चिंता का विषय है कि दिवालिया हो चुकी बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में उदासीन है। आपदा राहत की राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए था किन्तु इस वर्ष राज्य की आकस्मिक निधि एवं अन्य वित्तीय संसाधनों का उपयोग नियमित सरकारी खर्चों में इस प्रकार हुआ है कि आपदा के समय राहत के लिए धन की अत्यंत कमी हो रही है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में मेरा सविनय आग्रह है कि केंद्र सरकार-

1. बिहार की विनाशकारी बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करे।

2. बिहार की मदद के लिए तत्काल 5 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए विशेष बाढ़ राहत पैकेज उपलब्ध कराए।

3. भीषण बाढ़ से प्रभावित एवं सड़क संपर्कहीन क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त नाव, बोट एवं अन्य संसाधनों की तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए।

4. बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सेना एवं वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का सहयोग सुनिश्चित किया जाए।

5. भोजन, पेयजल, दवा, पशुचारा एवं अस्थायी आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

6. किसानों, मजदूरों, पशुपालकों एवं प्रभावित परिवारों के लिए विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

7. राज्य की वित्तीय एवं आपदा प्रबंधन तैयारियों तथा राज्य की आकस्मिक निधि के उपयोग व लेन-देन की स्वतंत्र समीक्षा / CAG परीक्षण कराई जाए।


सर्वविदित है कि बिहार की भौगौलिक स्थिति के कारण बिहार का 76% भूभाग बाढ़ग्रस्त रहता है। भारी वर्षापात और जलस्तर में वृद्धि के कारण कई दफा यह 80% से भी अधिक हो जाता है। बिहार की बाढ समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक Flood Resilience Mission प्रारंभ किया जाए जिसमें नदी एवं तटबंध प्रबंधन, जलनिकासी, जलाशयों का पुनर्जीवन, आधुनिक Flood Forecasting तथा नेपाल, बांग्लादेश एवं अन्य पड़ोसी देशों के साथ प्रभावी जल प्रबंधन नीति व संधि शामिल हो।


इस समय हमारी प्राथमिकता बिहार के नागरिकों का जीवन बचाना है। बिहार की जनता संकट में है जिन्हें अब राजनीति नहीं, ठोस राहत और जवाबदेही चाहिए। मैं आग्रह करता हूं कि केंद्र सरकार बिहार के साथ किसी प्रकार का सौतेला व्यवहार न करे और वर्तमान संकट को मानवीय एवं राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देखते हुए विशेष केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराएं। वर्तमान संकट में राज्य सरकार की किसी भी वित्तीय कठिनाई का प्रभाव राहत एवं बचाव कार्यों पर नहीं पड़ना चाहिए। विपदा की इस कठिन घड़ी में मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि अविलंब बिहार का दौरा कर हरसंभव मानवीय, वित्तीय एवं अन्य जरुरी सहायता उपलब्ध कराएं।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता