Nitish Kumar: नीतीश कुमार के वह फैसले जिसने बदल दी बिहार की पहचान, दूसरे राज्यों ने भी अपनाया मॉडल

Nitish Kumar: मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने बिहार में महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुधार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कीं। इन क्रांतिकारी योजनाओं ने बिहार की पहचान बदल दी।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 06, 2026, 2:07:48 PM

Nitish Kumar

नीतीश कुमार के बड़े फैसले - फ़ोटो Google

Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने राज्य के सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाई है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। उनकी विभिन्न योजनाओं से बिहार की महिलाओं के साथ-साथ पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिली है।


नीतीश सरकार ने देश में पहली बार बिहार की महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। इस फैसले से स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंच गई। बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी इस मॉडल को अपनाया।


वर्ष 2013 में बिहार पुलिस में 35 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया गया। इसके परिणामस्वरूप आज राज्य के कुल पुलिस बल में करीब 30 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं और महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 31 हजार से अधिक हो चुकी है। वहीं 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया। राज्य के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के दौरान भी लड़कियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है।


महिलाओं को मिली नई ताकत

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य से वर्ष 2006 में बिहार में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) परियोजना की शुरुआत की गई। आज इस योजना से 1.40 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़कर ‘जीविका दीदी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी हुई हैं। इसी मॉडल से प्रेरित होकर केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका मिशन लागू किया।


महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जा चुकी है। इसके अलावा रोजगार बढ़ाने की इच्छुक महिलाओं को दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने की भी व्यवस्था है।


कन्या उत्थान योजना और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने कई पहल कीं। वर्ष 2008-09 में कन्या उत्थान योजना की शुरुआत की गई, जिससे जन्म पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। एनएफएचएस के आंकड़ों के अनुसार जन्म पंजीकरण दर में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जननी बाल सुरक्षा योजना के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला। आशा और ममता जैसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के जरिए गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। वर्ष 2006-07 में जहां केवल लगभग 4 प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल जाती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।


बिहार में लागू हुई पूर्ण शराबबंदी

अप्रैल 2016 में बिहार में देशी और विदेशी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया। 2 अक्टूबर 2016, गांधी जयंती के दिन नया मद्य निषेध अधिनियम पूरे राज्य में लागू हुआ। इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया। शराबबंदी के बाद घरेलू हिंसा के मामलों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आई और परिवारों में आर्थिक बचत तथा सामाजिक स्थिरता बढ़ी।


अपराध नियंत्रण और सामाजिक अभियान

वर्ष 2005 के बाद अपराध नियंत्रण के लिए सरकार ने स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। इसके परिणामस्वरूप बिहार की कानून-व्यवस्था की स्थिति में बड़ा बदलाव आया और कई कुख्यात अपराधियों को जेल भेजा गया। बाल विवाह और दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए 2017 में राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के तहत लगभग ढाई करोड़ लोगों ने इन सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की शपथ ली। पंचायत प्रतिनिधि, स्कूली छात्र, सरकारी अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम जनता इसमें शामिल हुए।


शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल

महिलाओं की साक्षरता बढ़ाने के लिए 2009-10 से अक्षर अंचल योजना चलाई गई, जिसके माध्यम से अब तक 67 लाख से अधिक महिलाएं साक्षर हो चुकी हैं। वर्ष 2013 में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया। इसके कारण बिहार में महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति की साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिला।


इसके अलावा ‘हुनर’ कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक समुदाय की हजारों लड़कियों को विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया गया। ‘औजार’ कार्यक्रम के तहत उन्हें टूल-किट प्रदान की गई ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। वहीं महादलित बस्तियों के विकास के लिए पंचायतों और शहरी वार्डों में समुदाय से ही विकास मित्र नियुक्त किए गए हैं।