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‘सम्राट सरकार के फैसले से आ रही राजनीतिक प्रतिशोध की बू’, लालू-राबड़ी की सुरक्षा घटाने पर भड़कीं रोहिणी आचार्य

Bihar Politics: लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा घटाकर संशोधित कर दी गई है, जबकि तेजस्वी यादव की Y+ सुरक्षा बरकरार है। सुरक्षा बदलाव के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और रोहिणी आचार्य ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

Bihar Politics
रोहिणी का बड़ा हमला
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: बिहार में लालू प्रसाद यादव के परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार की नई समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा को घटा दिया गया है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी। 


वहीं तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और राजश्री यादव की सुरक्षा व्यवस्था भी नए सुरक्षा मानकों के अनुसार तय की गई है। सुरक्षा में इस बदलाव के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्ष की ओर से इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।


रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा, “लालू जी और राबड़ी देवी जी की सुरक्षा में कटौती के सम्राट सरकार के फैसले से राजनीतिक प्रतिशोध की बू आती है l ऐसा प्रतीत होता है कि नरसंहार के आरोपी मुख्यमंत्री के द्वारा लिए गए इस निर्णय के पीछे कोई गंदी मंशा है ! बेवजह राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा घटाना शासन नहीं, प्रतिशोध की राजनीति का संकेत है। 


लालू जी - राबड़ी देवी जी ने देश की राजनीति और देश में लोकतंत्र को बहाल रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उनकी सुरक्षा से समझौता करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक दायित्वों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास अगर तनिक भी विवेक बचा होगा तो उन्हें ये समझना होगा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को कमजोर करने जैसा है”।


बता दें कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पहले उन्हें Z+ सुरक्षा दी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते हैं। हालांकि मौजूदा सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा व्यवस्था उसके वर्तमान संवैधानिक पद और खुफिया एजेंसियों से प्राप्त खतरे के आकलन के आधार पर तय की जाती है। इसी समीक्षा के तहत उनकी सुरक्षा में बदलाव किया गया है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता