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बिहार के सरकारी स्कूलों में अराजकता: साल-6 महीने की नौकरी वाले टीचर बन रहे हेडमास्टर, शिक्षक संघ ने कहा-बंद करो ये सिस्टम

PATNA: बिहार सरकार ने अभी सरकारी स्कूलों में हेडमास्टर की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर रखी है. सरकार कह रही है कि हेडमास्टर की कुर्सी सिर्फ वैसे शिक्षकों को मिल सकती है,

बिहार के सरकारी स्कूलों में अराजकता: साल-6 महीने की नौकरी वाले टीचर बन रहे हेडमास्टर, शिक्षक संघ ने कहा-बंद करो ये सिस्टम
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

PATNA: बिहार सरकार ने अभी सरकारी स्कूलों में हेडमास्टर की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर रखी है. सरकार कह रही है कि हेडमास्टर की कुर्सी सिर्फ वैसे शिक्षकों को मिल सकती है, जिसके पास कम से कम 10 साल पढ़ाने का अनुभव हो. लेकिन, इसी सरकार ने बिहार के हजारों सरकारी स्कूलों में 6 महीने से लेकर एक साल की नौकरी वाले शिक्षकों को हेडमास्टर बनाने का आदेश जारी कर दिया है. 


अब आलम ये है कि सरकारी स्कूल में कुछ महीने की नौकरी वाले शिक्षक हेडमास्टर बन रहे हैं और 10-15 सालों से पढ़ा रहे टीचर उनके अंडर में काम कर रहे हैं. सरकार के इस फरमान से बिहार के सरकारी स्कूलों में अराजकता का आलम हो गया है. बिहार प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने आज सरकारी आदेश पर कड़ा एतराज जताते हुए सरकार को ज्ञापन सौंपा है. इसमें तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की गयी है. 


बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि सरकारी स्कूलों में अनुभवहीन नव-नियुक्त शिक्षकों को प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया जा रहा है. शिक्षा विभाग के निदेशक ने 4 सितंबर को एक आदेश जारी किया है, जिससे पूरे राज्य के शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई है. दरअसल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में नियोजित शिक्षक और बीपीएससी से नियुक्त शिक्षक काम कर रहे हैं और उस स्कूल में स्थायी हेडमास्टर न हो तो बीपीएससी से नियुक्त शिक्षक को हेडमास्टर का प्रभार दिया जाये. बीपीएससी से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी का एक साल भी पूरा नहीं हुआ है. लेकिन सरकार ने उन्हें 10-15 सालों से काम कर रहे नियोजित शिक्षकों से सीनियर बना दिया है. 


आज शिक्षा विभाग के निदेशक को सौंपे गये ज्ञापन में माध्यिमक शिक्षक संघ ने कहा है कि सरकार के इस फैसले से शैक्षणिक और प्रशासनिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है और स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न हो गई है. संघ के महासचिव शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि  राज्य के शिक्षक तनावमुक्त होकर अध्ययन-अध्यापन का काम निष्ठापूर्वक करते रहें, इसके लिए जरूरी है कि स्थानीय निकाय के 10 से 18 वर्षों तक के कार्यरत अनुभवी प्रभारी प्रधानाध्यापकों को स्थायी नियुक्ति तक बरकरार रखने का आदेश तत्काल जारी किया जाये. 


छुट्टी को लेकर भी स्कूलों में परेशानी

शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि इधर कुछ दिनों से विद्यालयों में लागू अवकाश तालिका की शिक्षा विभाग एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा अनदेखी किये जाने के कारण कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो गयी हैं. पर्व-त्योहार और यहाँ तक कि राजपत्रित अवकाश के दिन भी परीक्षा और प्रशिक्षण का कार्यक्रम निर्धारित कर देने से कई प्रकार की सामाजिक, धार्मिक एवं मानसिक समस्यायें  उत्पन्न हो रही हैं. लिहाजा शिक्षा विभाग पहले से तय अवकाश तालिका में किसी तरह की कटौती नहीं करे. शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने 2025 की अवकाश तालिका तैयार करने के लिए निदेशक को एक अवकाश तालिका भी दी ताकि निर्देश जारी करने में मदद मिले. 


शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि निदेशक को यह अवगत कराया है कि माध्यमिक शिक्षा के द्वारा ही अवकाश तालिका के निर्धारण के क्रम में त्रैमासिक सावधिक, वार्षिक परीक्षाओं की तिथियाँ  निर्धारित करने की परंपरा रही है. इसका भी निर्वहन नहीं किये जाने के कारण अध्ययन-अध्यापन और अनुशासन पर गलत प्रभाव पड़ रहा है. इसलिए पहले की तरह स्कूलों को ही आंतरिक परीक्षा संचालन का अधिकार दिया जाय.


शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रत्येक सेवा में प्रोन्नति सेवाकर्मियों के उन्नत अभिक्रम के लिए अनिवार्य सेवाशर्त निर्धारित होती है. स्थानीय निकाय के शिक्षकों को भी प्रोन्नति देने का प्रावधान नियोजन नियमावली में उपबंधित है. लेकिन इसका विभाग ने अनुपालन नहीं किया है. इसलिए राज्य की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को दृष्टि में रखते हुए यथाशीघ्र स्थानीय निकाय के शिक्षकों की प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू की जाय.

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