Loan crisis in Bihar : लोन के लिए बैंक से परेशान, सूदखोर घर पर पैसे पहुंचाते है ...जानिए बिहार की हकीकत

Loan crisis in Bihar : बिहार में अवैध सूदखोरी (महाजनी) का कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक शोषण के शिकार हो रहे हैं। बैंक लोन प्राप्त करने की जटिलताओं और सख्त शर्तों के कारण आम लोग चंगुल में फसने को मजबूर है |

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 26, 2025, 4:18:16 PM

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Loan crisis in Bihar : बिहार में बिना लाइसेंस के सूदखोरी (महाजनी) अवैध है, लेकिन यह गैरकानूनी धंधा समानांतर अर्थव्यवस्था के रूप में फल-फूल रहा है। करोड़ों के इस काले कारोबार का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है, और यह शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपनी जड़ें जमा चुका है। ऊंची ब्याज दरों पर पैसे उधार देने वाले सूदखोर मजबूर जनता का शोषण कर रहे हैं।

सूदखोरों की प्रताड़ना से बढ़ रही आत्महत्याएं

 रिपोर्ट्स और मीडिया खबरों के अनुसार, लोगों को  कर्ज के बोझ तले दबकर मानसिक और कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है । यह कुप्रथा न केवल गरीबों की कमर तोड़ रही है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचा रही है।

महाजनी से 'गुंडा बैंक' तक – कर्ज के नाम पर वसूली का खेल

पहले साहूकार जमीन और गहने गिरवी रखकर ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज देते थे, लेकिन अब 'गुंडा बैंक' नामक संगठित गिरोह गरीबों को मोटे ब्याज पर पैसे देकर उनसे जबरन वसूली कर रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने फरवरी 2022 में ऐसे अवैध कर्ज वसूली गिरोहों के खिलाफ एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था, लेकिन आज भी सूदखोरी का धंधा बदस्तूर जारी है।

कानूनी प्रावधान और प्रशासन की विफलता

बिहार साहूकारी अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग कंट्रोल एक्ट, 1986 के तहत बिना लाइसेंस सूदखोरी करना अपराध है, जिसमें तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके, प्रशासन प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रहा है।

सूदखोरी से जुड़े विवाद और अपराध बढ़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 2,930 हत्याएं दर्ज की गई थीं, जो उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरी सबसे अधिक थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कई हत्याएं साहूकारी से जुड़े विवादों के कारण हुईं।

बिहार में बैंक लोन की समस्या और आर्थिक पिछड़ापन

बिहार का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात (CDR) राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, जिससे राज्य की आर्थिक प्रगति बाधित हो रही है। मार्च 2023 तक, बिहार का सीडीआर 53.01% था, जबकि राष्ट्रीय औसत 75.80% रहा। राज्य के 38 में से 28 जिले 'क्रेडिट डिफिशिएंट' हैं, जहां प्रति व्यक्ति ऋण उपलब्धता ₹60,000 से भी कम है।

बिहार में लोन नहीं, तो सूदखोरी का शिकंजा

बिहार में बैंक ऋण उपलब्ध न होने की वजह से लोग साहूकारों और निजी महाजनों से ऊंची ब्याज दर पर पैसा उधार लेने को मजबूर होते हैं। ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की कमी और लोन की सख्त शर्तों के चलते सूदखोरी का जाल तेजी से फैल रहा है।

बिहार में सीडीआर कैसे बढ़े?

MSME सेक्टर को मजबूत करना होगा ताकि स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों को अधिक लोन मिले। बैंकों को लोन वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाना होगा ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय लोग बैंकिंग सेवाओं से जुड़ सकें। सरकार को वित्तीय जागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग सूदखोरी के जाल से बच सकें।

समाधान की जरूरत

सरकार को अवैध महाजनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। पीड़ितों को कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं तक पहुंच और आसान बैंकिंग सेवाओं की सुविधा दी जानी चाहिए। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सूदखोरी बिहार की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को और अधिक नुकसान पहुंचा सकती है।