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मंत्री के साथ बदसलूकी मामले की इनसाइड स्टोरी: DM-SSP का फोन नहीं उठा रहे थे जीवेश मिश्रा, डिप्टी सीएम ने कॉल किया तो मिलने पर राजी हुए

PATNA: गुरूवार की सुबह पटना के डीएम औऱ एसएसपी की मनमानी का मामला उठा कर सुर्खियों में आये मंत्री जीवेश मिश्रा आखिरकार उसी रात दोनों अधिकारियों से मिलने को तैयार कैसे हो गये? इसकी इ

मंत्री के साथ बदसलूकी मामले की इनसाइड स्टोरी: DM-SSP का फोन नहीं उठा रहे थे जीवेश मिश्रा, डिप्टी सीएम ने कॉल किया तो मिलने पर राजी हुए
Tejpratap
Tejpratap
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PATNA: गुरूवार की सुबह पटना के डीएम औऱ एसएसपी की मनमानी का मामला उठा कर सुर्खियों में आये मंत्री जीवेश मिश्रा आखिरकार उसी रात दोनों अधिकारियों से मिलने को तैयार कैसे हो गये? इसकी इनसाइड स्टोरी सामने आयी है. जानकार बता रहे हैं कि बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद को खुद फोन कर जीवेश मिश्रा को मनाना पड़ा तब जाकर मंत्री पटना के डीएम-एसएसपी से मिलने को तैयार हुए. वर्ना जीवेश मिश्रा तो दोनों अधिकारियों का फोन तक नहीं रिसीव कर रहे थे.

ये है इनसाइड स्टोरी

दरअसल मंत्री के साथ बदसलूकी के मामले में सरकार ने गुरूवार की शाम तक पूरी कोशिश यही की कि मामला रफा दफा हो जाये. लेकिन मंत्री जीवेश मिश्रा अड गये थे. उन्होंने दिल्ली में बीजेपी के आलाकमान तक को सूचित कर दिया था-जब अपनी इज्जत ही नहीं बची तो फिर मंत्री रहने का क्या मतलब. बीजेपी के आंतरिक सूत्र बताते हैं कि पटना से लेकर दिल्ली तक पार्टी में खलबली मच गयी थी. कम से कम दो केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी के दो बडे पदाधिकारियों ने जीवेश मिश्रा को कॉल कर मामले की जानकारी ली. 

बीजेपी के एक नेता ने बताया कि मंत्री ने आलाकमान को साफ कह दिया था-अगर पार्टी कहेगी तो वे चुप हो जायेंगे लेकिन मंत्रियों-विधायकों के साथ साथ पार्टी की भी इज्जत मिट्टी में मिल जायेगी. इसके बाद लगभग पूरी पार्टी मंत्री के साथ खड़ी हो गयी. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने ट्वीट कर जीवेश मिश्रा का समर्थन कर दिया. नीतीश कुमार को संकेत मिल गया था कि बीजेपी इस मामले में झुकने को तैयार नहीं है. लिहाजा विधानसभा अध्यक्ष के मत्थे पूरा मामला छोड़ दिया गया.

वैसे देर शाम तक नीतीश और उनके खास अधिकारियों को उम्मीद थी कि हर बार की तरह इस बार भी बीजेपी बैकफुट पर आयेगी. तभी बिहार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद और डीजीपी एस के सिंघल ने कह दिया था कि मंत्री के साथ कोई बदसलूकी हुई ही नहीं. लेकिन जैसे जैसे शाम ढ़ली वैसे वैसे ये लगने लगा था कि बीजेपी बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है. मंत्री जीवेश मिश्रा इस्तीफा देने तक को तैयार हैं औऱ पार्टी एक जिले के अधिकारियों के लिए अपने मंत्री का बलि चढाने को तैयार नहीं है. बीजेपी के तेवर को देख कर सरकार को मामले की संजीदगी का अहसास हुआ. पटना के डीएम-एसएसपी को मैसेज आया-मामले को मैनेज करें वर्ना खतरा हो सकता है.

मंत्री ने अधिकारियों का फोन रिसीव नहीं किया

जानकार सूत्र बताते हैं कि शाम में जैसे ही पटना के डीएम और एसएसपी को मामले की गंभीरता का अहसास हुआ वैसे ही उनकी बेचैनी बढ़ी. विधानसभा अध्यक्ष को मैनेज करने का सवाल ही नहीं था लिहाजा मंत्री को शांत करने की रणनीति पर काम शुरू हुआ. सूत्र दावा कर रहे हैं कि पटना के डीएम औऱ एसएसपी के नंबरों से मंत्री जीवेश मिश्रा के मोबाइल पर कम से कम एक दर्जन कॉल आया. मंत्री जीवेश मिश्रा अमूमन अपने मोबाइल पर आने वाले कॉल को खुद रिसीव करते हैं. लेकिन उन्होंने गुरूवार की शाम कोई कॉल रिसीव ही नहीं किया. उन्होंने पटना के डीएम-एसएसपी का कॉल भी रिसीव नहीं किया.

बीचबचाव में उतरे तारकिशोर प्रसाद

बीजेपी के ही एक नेता ने बताया कि मंत्री जीवेश मिश्रा से पटना के डीएम-एसएसपी को मिलवाने के लिए डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद को हस्तक्षेप करना पड़ा. डिप्टी सीएम ने मंत्री को फोन कर कहा कि वे डीएम औऱ एसएसपी से मिल लें. लेकिन जीवेश मिश्रा तैयार नही हुए. सूत्र बताते हैं कि डिप्टी सीएम के बहुत समझाने के बाद जीवेश मिश्रा पटना के डीएम और एसएसपी से मिलने को तैयार हुए लेकिन तारकिशोर प्रसाद को भी साफ कर दिया कि वे मामले को मैनेज नहीं करेंगे. 

वैसे अब सबसे बडा सवाल ये है कि विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा क्या फैसला लेते हैं. हालांकि ये जगजाहिर है कि सरकार का दबाव उन पर भी होगा. लेकिन मंत्री अड़े हैं. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि फैसला क्या आता है.

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