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मुजफ्फरपुर में सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग का वीडियो वायरल, तिमुल अध्यक्ष की फैमिली पर सवाल, ग्रामीण SP ने दिए जांच के आदेश

मुजफ्फरपुर में सरकारी बोर्ड लगी गाड़ी के दुरुपयोग का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया है। तिमुल अध्यक्ष के परिजनों से जुड़े आरोपों पर ग्रामीण SP ने जांच के आदेश दिए हैं।

MUZAFFARPUR
प्रशासनिक महकमे में हलचल
© SOCIAL MEDIA
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

MUZAFFARPUR: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो और कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। वायरल वीडियो और फोटो में एक युवक को कथित तौर पर बिहार सरकार की गाड़ी का दुरुपयोग करते हुए देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 


सरकारी बोर्ड लगी गाड़ी का निजी इस्तेमाल?

सोशल मीडिया पर वायरल फोटो और वीडियो में जिस गाड़ी का जिक्र हो रहा है, उस पर स्पष्ट रूप से “चेयरमैन तिमुल, बिहार गवर्नमेंट” लिखा हुआ है। वीडियो में दिख रहा युवक जिस बेफिक्रि के साथ सरकारी वाहन का उपयोग कर रहा है, उसने जनता के बीच व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि सरकारी पद की गरिमा और संसाधनों का इस्तेमाल निजी रसूख दिखाने के लिए किया जा रहा है।


तिमुल अध्यक्ष और उनके परिवार से जुड़े तार

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और सोशल मीडिया दावों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण को तिमुल (मुजफ्फरपुर डेयरी) की वर्तमान अध्यक्ष सुशीला देवी और पूर्व अध्यक्ष के पुत्र गोविंद यादव से जोड़कर देखा जा रहा है। आरोप है कि सरकारी कार्यों के लिए आवंटित इस वाहन का उपयोग परिवार के सदस्यों द्वारा निजी कार्यों या रसूख प्रदर्शन के लिए किया जा रहा था। हालांकि, इस दावे में कितनी सच्चाई है, यह अभी आधिकारिक जांच का विषय है।


प्रशासन में मची खलबली

वीडियो के संज्ञान में आते ही जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन अब इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रहा है कि संबंधित सरकारी वाहन आधिकारिक रूप से किसके नाम पर आवंटित है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि किन परिस्थितियों में एक बाहरी व्यक्ति या निजी युवक इस सरकारी गाड़ी का उपयोग कर रहा था। सरकारी नियमों के अनुसार, पद के लिए आवंटित वाहन का उपयोग केवल आधिकारिक कार्यों के लिए ही किया जा सकता है।


ग्रामीण एसपी का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता और जनता के बीच बढ़ती नाराजगी को देखते हुए मुजफ्फरपुर के ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। एसपी ने निर्देश दिया है कि वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीण एसपी के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी और कानून सम्मत कदम उठाए जाएंगे।


आधिकारिक बयान का इंतजार

फिलहाल, इस पूरे विवाद पर न तो तिमुल प्रबंधन की ओर से और न ही संबंधित परिवार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। लोगों की नजरें अब पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। गौरतलब है कि वायरल हो रहे इन वीडियो और तस्वीरों की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। यह घटनाक्रम एक बार फिर बिहार में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और रसूखदारों की मनमानी पर सवालिया निशान लगाता है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस मिसाल पेश करता है या यह मामला भी जांच के कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता