1st Bihar Published by: 8 Updated Aug 01, 2019, 4:24:02 PM
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DESK : कैंसर एक खतरनाक बीमारी है. लेकिन किसी ट्रेन का नाम ही कैंसर हो तो कैसा लगेगा. जी हां हम बात कर रहें है एक ऐसी ट्रेन की जिसका नाम कैंसर ट्रेन है. पूछ-ताछ खिड़की पर अक्सर, लोग इस ट्रेन की इनक्वायरी कैंसर ट्रेन बोलकर ही करते हैं. अब तो रेलवे कर्मचारी भी इस नाम के आदी हो गये हैं और उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती. https://www.youtube.com/watch?v=kBciuia_Ht4 दरअसल आप सोच रहें होंगे की इस ट्रेन को लोग कैंसर ट्रेन क्यों कहते हैं. तो बता दूं कि रोज़ाना रात को तकरीबन 9 बजकर 25 मिनट पर बठिंडा से बीकानेर तक जाने वाली यह ट्रेन अपने आप में एक मिशाल से कम नहीं है. 12 कोचेज़ वाली इस ट्रेन में कैंसर मरीज़ को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है. मरीज़ के साथ एक यात्री को किराए में 75% तक की छूट भी मिलती है. रोज़ लगभग 200 से ज़्यादा कैंसर मरीज़ इसमें सवार होते हैं. सबकी मंज़िल होती है बीकानेर का आचार्य तुलसी रीज़नल कैंसर ट्रीटमेंट और रिसर्च सेंटर. आपको बता दें कि आचार्य तुलसी रीज़नल कैंसर ट्रीटमेंट और रिसर्च सेंटर उन चुनिंदा अस्पतालों में से है जहां हर कैंसर का इलाज मुमकिन है. अस्पताल में इलाज का खर्च भी काफी किफायती है. यहां दवाइयां भी बेहद किफायती दाम पर उपलब्ध हैं. इसी के साथ अस्पताल की कैंटीन में बेहद सस्ता खाना और जो मरीज भर्ती नहीं हैं और उनके रिश्तेदारों को रुकने के लिये धर्मशाला में 50 रुपये में कमरा उपलब्ध करवाया जाता है. इसी के साथ-साथ पंजाब सरकार की मुफ्त इलाज स्कीम मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष स्कीम के तहत भी ये अस्पताल दर्ज है. पंजाब के सबसे करीब इस कैंसर अस्पताल के होने से ही पंजाब के लोग कैंसर ट्रेन से बीकानेर आते हैं.