1st Bihar Published by: Updated Tue, 10 Mar 2020 10:35:41 AM IST
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PATNA : सत्ता के गलियारों में होली की चर्चा हो और लालू यादव का नाम न लिया जाए ऐसा हो नहीं सकता। लालू की कुर्ता फाड़ होली का दौर अब थम चुका है लेकिन हर बार होली में इसकी चर्चा जरूर होती है। बिना आरजेडी सुप्रीमो की उस होली की चर्चा के बिहार की होली फीकी दिखती है। चारा घोटाले में जेल जाने के बाद अब लालू आवास पर होली के दिन सन्नाटा पसरा रहता है।
आरजेडी सुप्रीमो की कुर्ता फाड़ होली का दौर 1997 और 2000 के बीच अपने शबाब पर था। लालू आवास की होली का इतना क्रेज था कि विपक्षी दलों के नेता भी इस होली समारोह में हिस्सा लेने के लिए आते थे। लालू होली भी अपने ही अंदाज में खेलते थे। नेताओं का कुर्ता भी फाड़ देते थे। ऐसे में जिस नेता का कपड़ा नहीं फटा वह दूसरे नेताओं से कपड़ा उनका फड़वा देते थे। इस दौरान लालू कपड़ा फाड़ने के लिए ललकारते रहते थे। उनके आवास पर घंटों होली होती थी। उनके आवास पर नेता तो बढ़िया कपड़ा पहनकर आते,लेकिन जाने के दौरान वह फटे हुए कपड़ों में लौटते थे।
लालू की कुर्ता फाड़ होली में जश्न के दौरान बैंड बाजा बजता था। इस दौरान कई नेता डांस भी करते थे। रंग और अबीर जमकर उड़ता था। ठंडई के साथ ही खाने का इंतजाम होता था। लालू के साथ होली खेलने का नेताओं को इंतजार रहता था। कुर्ता फाड़ होली में यह नहीं देखा जाता था कि किसका कद कितना बड़ा है। जो जिसके पकड़ में आए उसका कुर्ता फाड़ने में लग जाता था। कई विधायक और मंत्री मिलकर लालू का कुर्ता फाड़ देते थे। लालू भी दूसरों का कुर्ता फाड़ने में पीछे नहीं रहते थे। कुछ देर कुर्ता फाड़ होली खेलने के बाद फिर से एक-दूसरे के शरीर पर रंग डाला जाता था।लालू यादव के घर में कुर्ता फाड़ होली खेलने के बाद गीत-संगीत का दौर शुरू होता था। इस दिन यह नहीं देखा जाता कि किसका सुर बैठ रहा है और कौन कितना अच्छा ढोलक बजा रहा है। सब दिल से गाते और बजाते थे। लालू यादव खुद ढोल और मंजीरा जैसे वाद्य यंत्र बजाते थे।
लेकिन लालू के जेल जाने के बाद से यह सब बंद हो गया। लालू चारा घोटाले केस में सजायाफ्ता है, फिलहाल वह रिम्स में भर्ती है वह 15 बीमारियों से पीड़ित हैं।साल 2017 में होली का रंग लालू परिवार के लिए फीका दिखा और उसके बाद 2018 और 2019 में इस परिवार ने होली समारोह का आयोजन नहीं करने का फैसला किया। परिवार ने 2018 में लालू यादव की सजा का हवाला दिया, जबकि 2019 में पुलवामा में हुए सीआरपीएफ काफिले पर हमले के चलते ऐसे समारोह से दूर रहने रहने का फैसला किया।