नीतीश को डिजिटल अरेस्ट किया गया: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी पर बोला हमला, कहा..अब चंद्रबाबू नायडू की बारी

भाजपा पहले दोस्ती करती है फिर हराती है और पीछे से छुड़ा भोंकती है। भाजपा और जेडीयू का गठबंधन अननेचुरल है। उन्होंने कहा कि पता नहीं आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई कि नीतीश जैसे नेता अपने विधायकों की भी बातें नहीं सुन रहे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 09, 2026, 8:40:29 PM

बिहार न्यूज

BJP पर साधा निशाना - फ़ोटो सोशल मीडिया

PATNA: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। कहा कि भाजपा पहले दोस्त बनाती है फिर छुरा भोंकती है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को डिजिटल अरेस्ट किया गया अब अगला नंबर चंद्रबाबू नायडू का है। 


नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के फैसले पर बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि होली की अंगड़ाई टूटने से पहले ही बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। नीतीश के अचानक राज्यसभा जाने का फैसला कांग्रेस के लिए कोई हैरानी की बात नहीं है। 


राजेश राम ने कहा कि हमें यह पहले से मालूम था कि ऐसा होगा। हमने जो भविष्यवाणी की थी उस पर आखिरकार मुहर लग ही गयी। राजेश राम ने कहा कि नीतीश कुमार को डिजिटल अरेस्ट किया गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने आज एक और भविष्यवाणी कर दी है। उन्होंने कहा कि अब अगला नंबर चंद्रबाबू नायडू का है। उनकों भी बीजेपी डिजिटल अरेस्ट करेगी। 


राजेश राम ने आगे कहा कि कांग्रेस सामने से लड़ाई लड़ती है जबकि भाजपा पहले दोस्ती करती है फिर हराती है और पीछे से छुड़ा भोंकती है। भाजपा और जेडीयू का गठबंधन अननेचुरल है। उन्होंने कहा कि पता नहीं आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई कि नीतीश जैसे नेता अपने विधायकों की भी बातें नहीं सुन रहे हैं। राजेश राम ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद से विधायकों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने तक नहीं दिया जा रहा है। 


आखिर ऐसी कौन सी बात है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला ले लिया। उनके कार्यकर्ता उन्हें बिहार छोड़कर दिल्ली जाने नहीं देना चाहते। कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन किया और हंगामा भी मचाया यहां तक की फूट-फूट कर रोये लेकिन नीतीश कुमार ने ना तो राज्यसभा जाने का फैसला वापस लिया और ना ही कार्यकर्ताओं के आंसू ही पोछ पाए। नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि वे अपने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बातें सुनते हैं, लेकिन इस मामले में वो किसी की नहीं सुन रहे हैं। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी हो गयी कि वो किसी की बात मानने को तैयार नहीं हैं।