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बिहार का पलटीमार राजनीति वाला जिला: एक जिले के सारे विधायकों ने की है बगावत, पड़ोसी जिले पर भी पड़ा असर

PATNA: बिहार में एक ऐसा भी जिला है जहां के सारे विधायक अपनी पार्टी से बागी हो गये हैं. इस जिले में कुल 4 विधायक हैं. तीन ने पार्टी ही बदल ली है. छठे विधायक जिस पार्टी से चुनाव जीते

बिहार का पलटीमार राजनीति वाला जिला: एक जिले के सारे विधायकों ने की है बगावत, पड़ोसी जिले पर भी पड़ा असर
Mukesh Srivastava
4 मिनट

PATNA: बिहार में एक ऐसा भी जिला है जहां के सारे विधायक अपनी पार्टी से बागी हो गये हैं. इस जिले में कुल 4 विधायक हैं. तीन ने पार्टी ही बदल ली है. छठे विधायक जिस पार्टी से चुनाव जीते उसी में हैं लेकिन वहां भी जमकर गदर काटा है. जाहिर है इस जिले ने बिहार की राजनीति में पलटी मारने का रिकार्ड बना दिया है. खास बात ये है कि कैमुर जिले की पलटीमार राजनीति का असर पड़ोस के जिले पर भी पड़ा है.


कैमूर जिले की कहानी

पलटीमार राजनीति का उदाहरण बन चुके इस जिले का नाम कैमुर है. उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसे इस जिले के सारे के सारे विधायक बागी हो गये हैं. 2020 के चुनाव के तुरंत बाद से ही इस जिले के विधायकों ने पलटी मारना शुरू किया, जो आज तक जारी है. विधानमंडल के सत्र के आखिरी दिन इस जिले के भभुआ विधानसभा क्षेत्र के विधायक भरत बिंद ने पाला बदल लिया. भरत बिंद राजद के टिकट पर चुनाव जीते थे और आज भाजपा का दामन थाम लिया.


2020 से हुई शुरुआत

कैमुर जिले के विधायकों के पाला बदलने का सिलसिला 2020 के चुनाव के ठीक बाद शुरू हो गया था. इस जिले के चैनपुर विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जमा खां ने जीत दर्ज की थी और विधायक बने थे. लेकिन चुनाव के ठीक बाद वे जेडीयू में शामिल हो गये. इनाम में उन्हें नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में पद मिला.


जिले की तीसरी विधायक संगीता कुमारी हैं. वे मोहनिया क्षेत्र से राजद के टिकट पर विधायक चुनी गयी थीं. लेकिन विधानसभा के इसी सत्र में वे भाजपा के साथ चली गयीं. संगीता कुमारी पहली दफे विधायक बनी हैं. वैसे शुक्रवार को भाजपा के पाले में जाने वाले भरत बिंद ने अपनी राजनीति की शुरूआत बीजेपी से ही की थी. बाद में वे बसपा में चले गये थे और वहां जिलाध्यक्ष बने. पिछले चुनाव में उन्होंने राजद का दामन थाम कर चुनाव लड़ा और विधायक बन गये.


चौथे विधायक भी बागी

कैमुर जिले का चौथा विधानसभा क्षेत्र रामगढ़ है. रामगढ से राजद के विधायक सुधाकर सिंह हैं. सुधाकर सिंह को 2022 में बनी जेडीयू-आरजेडी की सरकार में मंत्री बनाया गया था. लेकिन उन्होंने बगावत कर दी. नतीजतन मंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी. बाद में भी उन्होंने लगातार बगावती तेवर अपनाये रखा, लिहाजा पार्टी ने उन्हें दल से निकालने का नोटिस भी दिया था. हालांकि राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के पुत्र होने के कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया.


पड़ोसी जिले पर भी असर

कैमुर जिले से सटा हुआ विधानसभा क्षेत्र है चेनारी. ये रोहतास जिले में आता है. यहां के विधायक मुरारी गौतम ने भी पाला बदल लिया है. मुरारी गौतम कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं. उनके पिता भी कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं. लेकिन खानदानी राजनीति से अलग होकर मुरारी गौतम बीजेपी के साथ आ चुके हैं.