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TB Day: टीबी हारेगा, देश जीतेगा के नारे से लोगों को किया जागरूक

TB Day: विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर सूर्यगढ़ा में जागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसमें ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के नारे के साथ लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया गया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 24, 2025, 7:01:11 PM

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

TB Day: विश्व यक्ष्मा (TB) दिवस के अवसर पर सोमवार को सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक जागरूकता रैली निकाली गई। इस रैली में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ  बालिका उच्च विद्यालय की छात्राओं ने भी भाग लिया।रैली के माध्यम से लोगों को टीबी (क्षयरोग) के बारे में जागरूक किया गया और बताया गया कि इसका इलाज सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। छात्राएं हाथों में बैनर और स्लोगन लिए ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के नारे लगाकर लोगों को जागरूक कर रही थीं। यह रैली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शुरू होकर सूर्यगढ़ा बाजार स्थित शहीद द्वार तक गई और फिर वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लौटी।


बीएचएम ने जानकारी दी कि पूरे देश में टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत यह जागरूकता रैली आयोजित की गई। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वाई. के. दिवाकर ने कहा कि टीबी का इलाज लंबी अवधि तक चलता है, लेकिन यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टीबी मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि लोग समय रहते लक्षण पहचानकर इलाज करवा सकें।

आपको बता दे कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीबी से होने वाली मौतों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की गई है। पहले प्रति एक लाख जनसंख्या पर जहां 28 मौतें होती थीं, अब यह संख्या घटकर 22 रह गई है, जो 21.4% की गिरावट को दर्शाती है।


हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य तपेदिक जैसी संक्रामक और घातक बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने WHO की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में टीबी मामलों में 17.7% की कमी आई है। वर्ष 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 मामले थे, जो 2023 में घटकर 195 हो गए।

यह वैश्विक औसत 8.3% की गिरावट से दोगुनी से भी अधिक है।डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि 2015 से भारत ने टीबी के छूटे हुए मामलों की पहचान में जबरदस्त प्रगति की है। यह उपलब्धि सराहनीय है, लेकिन भारत सरकार द्वारा 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य पर हमें अभी और प्रयास करने की जरूरत है।