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Jdu Politics: जेडीयू में दोहरी नीति ! पार्टी ने बनाया प्रभारी और बन गए कैंडिडेट तो एक पर कार्रवाई...'फोटो छाप' नेताजी पर चुप्पी क्यों ?

Jdu Politics: नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में विधानसभा प्रभारियों के उम्मीदवार बनने का सिलसिला जारी है। सहयोगी दल के सीटिंग विधायकों के खिलाफ बयानबाज़ी और खुद को प्रत्याशी घोषित करने के बावजूद पार्टी चुप है. क्या जेडीयू में दोहरी नीति चल रही है?

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Viveka Nand
5 मिनट

Jdu Politics:  नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में अजब-गजब का खेल चलता है. पार्टी जिसे प्रभारी बनाती है, वो उस विधानसभा क्षेत्र का उम्मीदवार बन जा रहा. नेताओं की महत्वकांक्षा से पार्टी की भारी फजीहत हो रही है. भद्द पिटने के बाद कार्रवाई की जा रही, लेकिन यहां भी दोरंगी नीति. आज भी कई ऐसे विधानसभा प्रभारी हैं, जो जिस क्षेत्र के प्रभारी बने, वहां उम्मीदवार बन गए, सहयोगी दल के सीटिंग विधायक के खिलाफ खुल्लम खुल्ला बोला, खुलेआम प्रत्याशी बन बैठे, मीडिया में बयान जारी किया. इसके बाद भी पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की. जबकि, ऐसे ही आरोपों में हाल में कई पर गाज गिर चुकी है. भोजपुर जिले के एक विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी ने यही काम किया, खुद को उम्मीदवार बना लिया, सहयोगी दल के सीटिंग विधायक के खिलाफ बयान जारी किया, लेकिन आज तक जनता दल (यू) ने कोई कार्रवाई नहीं की.  

जेडीयू ने सात विधानसभा क्षेत्रों में बनाए नए प्रभारी 

बिहार प्रदेश जेडीयू ने 16 अप्रैल को सात विधानसभा क्षेत्रों में नए प्रभारी की नियुक्ति की है. मुख्यालय प्रभारी की तरफ से पत्र जारी किया गया है. जिन विधानसभा क्षेत्रों में नए प्रभारी बनाये गए हैं, उनमें राजनगर, बख्तियारपुर, सोनवर्षा बेलदौर,सोनपुर,जगदीशपुर और नौखा शामिल है. इन विधानसभा क्षेत्रों के एक-दो पूर्व प्रभारियों पर आरोप है कि अधिकार का गलत इस्तेमाल किया. वैसे, जो विधानसभा प्रभारी से हटाये गए हैं, सिर्फ वे ही नहीं हैं, बल्कि आज भी कई ऐसे विधानसभा प्रभारी हैं, जो प्रभारी की बजाय उक्त विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार बन बैठे हैं. पार्टी के एक महासचिव हैं, वे पटना से सटे भोजपुर जिले के एक विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी हैं. प्रभारी बनते ही वहां के उम्मीदवार बन गए. उस क्षेत्र में जाकर माहौल बनाने लगे. उक्त सीट पर सहयोगी दल के विधायक हैं, उनके खिलाफ बयान देने लगे. मीडिया में अपने आप को प्रत्याशी घोषित करने लगे. तमाम सबूत मौजूद है. जेडीयू के उक्त नेताजी जो भोजपुर के एक विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी हैं, कुछ दिन पहले तक सहयोगी दल के सीटिंग विधायक के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. विकास के मुद्दे पर विधायक को घेर रहे थे. कह रहे थे....यहां विकास नहीं हुआ है। विकास तो नीतीश कुमार कर रहे हैं। सड़क विधायक नहीं, बल्कि नीतीश कुमार बनाते हैं। पार्टी उन्हें उक्त विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी बनाकर भेजा, लेकिन वो स्वयं प्रत्याशी बन गए। कहने लगे वे ब#### की जनता का सुख-दुख जानने पहुंचते रहे हैं। जरूरत का सामान भी उपलब्ध कराते रहे हैं। कंबल तक बांटा, बहुत कुछ किया है और भी करेंगे. 

कौन हैं वो प्रभारी जो प्रत्याशी बन बैठे हैं ? जिन पर पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की ...

JDU के वो कौन नेताजी हैं, जिन्हें पार्टी ने विधानसभा प्रभारी बनाया और बन गए उम्मीदवार, जिन पर अब तक गाज नहीं गिरी है. दरअसल, 16 अप्रैल को पार्टी ने नए प्रभारियों की सूची जारी की है. उस लिस्ट में एक विधानसभा क्षेत्र है, जिस पर सबकी नजर टिक गई. जानकार बताते हैं कि पूर्व प्रभारी को प्रत्याशी बनने के आरोप में हटाकर नए प्रभारी की नियुक्ति की गई है. बड़ा सवाल यही है कि जब आरोप एक है, तब एक पर कार्रवाई, दूसरे पर क्यों नहीं  ?  अब आइए इस पर कि, वैसे कितने नेता हैं जिन्हें जेडीयू ने प्रभारी बनाया और बन गए उम्मीदवार ?  हम आपको बताते हैं...पार्टी के एक नेता हैं...जिनकी राजनीतिक दुकानदारी फोटो से चलती है . पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर उस नेता का फोटो बंद...तो राजनीति की दुकान बंद हो जाएगी. फोटो छाप नेताजी को पार्टी ने भोजपुर के एक विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी क्या बनाया, वो खुद वहां से उम्मीदवार बन गए। फोटो छाप नेताजी उम्मीदवारी की बात मीडिया में करने लगे. बयान देने लगे, सीटिंग विधायक के खिलाफ आग उगलने लगे. फोटो प्रेमी उक्त नेता के कारनामों से दल के वरिष्ठ नेता भी परेशान रहते हैं. पार्टी के अंदर उक्त नेता को उनके असली नाम से नहीं, फोटू के नाम से जाना जाता है. इस नाम के नेता आपको सरकारी आयोजनों-समारोह में दिख जाएँगे, दूसरे दिन अखबारों में भी उक्त नेता की तस्वीर दिख जायेगी.   

बड़ा सवाल यही है कि, जब एक प्रभारी उम्मीदवार बन गया, उस पर कार्रवाई हो गई, इसी तरह के आरोप फोटो छाप वाले नेता पर है, फिर उन पर क्यों नहीं? इसका जवाब पार्टी को देना होगा. वरना दल के अंदर भारी अंसतोष पैदा हो सकता है.