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अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता विफल: होर्मुज स्ट्रेट पर संकट अब भी बरकरार, वैश्विक चिंता बढ़ी

US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल रही. वार्ता विफल होने से होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बरकरार है और वैश्विक तेल आपूर्ति व अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता एक बार फिर से बढ़ गई है.

US Iran Talks
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता पूरी तरह विफल हो गई है। करीब 21 घंटे तक चली इस बैठक से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई समाधान निकलेगा, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इससे वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।


अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कहा कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया। वहीं, ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें अत्यधिक थीं और उन्हें मानना संभव नहीं है। इस तरह दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे और बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई।


ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने भी साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी 28 फरवरी से जो हालात बने हुए हैं, वे आगे भी जारी रह सकते हैं।


होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। ऐसे में इसका बंद रहना सीधे तौर पर तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीजल और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।


8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ था, जिसमें प्रतिदिन सीमित संख्या (करीब 15) में जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर सहमति बनी थी। लेकिन लेबनान पर हमले के बाद हालात फिर बिगड़ गए और ईरान ने दोबारा इस मार्ग को बंद कर दिया। इससे पहले हुए समझौते का असर ज्यादा देर तक नहीं टिक सका।


ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, क्योंकि इससे उसे मध्य-पूर्व में अपनी ताकत और प्रभाव बनाए रखने में मदद मिलती है। फिलहाल स्थिति यह है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की संभावना बेहद कम है।


इस संकट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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