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‘नीतीश जी चुनौती का सामना करने वाले नेता नहीं बन पाए’, मुख्यमंत्री के पुराने करीबी ने दिखाया आईना

Bihar Politics: बिहार की सियासत में हलचल के बीच शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उनके नेतृत्व और वैचारिक प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए।

Bihar Politics
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब किसी भी वक्त सीएम की कुर्सी छोड़ सकते हैं। राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ के बाद अब उनके इस्तीफे पर सभी की नजर है। इसी बीच नीतीश कुमार के पुराने करीबी और बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए नीतीश कुमार को आईना दिखाने की कोशिश की है।


शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पर लिखा, “नीतीश जी कभी सीधे खड़े होकर किसी चुनौती का सामना करने वाले नेता नहीं बन पाए। उनके भीतर वह हिम्मत नहीं दिखती, जो बड़े निर्णयों के समय आदमी को अकेले खड़े रहने की ताकत देती है।

याद कीजिए, जब उनकी सरकार बनी थी तो उन्होंने दो बड़े संकल्प लिए थे—बिहार में भूमि सुधार लागू करेंगे और सभी बच्चों के लिए समान शिक्षा की व्यवस्था करेंगे। ये दोनों संकल्प सामाजिक परिवर्तन के बड़े एजेंडा थे। लेकिन इनको पूरा करने के लिए जिस राजनीतिक दृढ़ता, संगठन और टकराव की तैयारी चाहिए थी, उसका अभाव साफ दिखाई दिया। परिणाम यह हुआ कि दोनों ही मुद्दे धीरे-धीरे फाइलों और समितियों में दबकर रह गए।

बीच-बीच में उनके भीतर का समाजवादी भी जागता था—गांधी, लोहिया, जयप्रकाश और कर्पूरी ठाकुर की परंपरा का असर भी दिखता था। कभी वे विधानसभा में “RSS मुक्त भारत” की बात करते थे, कभी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ देश भर में घूमकर महागठबंधन बनाने की पहल करते थे। उस समय लगता था कि उनके भीतर की वैचारिकता अभी जीवित है. 

लेकिन आज वही व्यक्ति उसी भारतीय जनता पार्टी को बिहार की सत्ता सौंपने जा रहा है जिसके खिलाफ वह एक समय देशव्यापी एकता खड़ा करने का अभियान चला रहा था. यह महज़ राजनीतिक बदलाव नहीं है बल्कि नीतीश कुमार का वैचारिक आत्मसमर्पण है. नीतीश कुमार के साथ मेरा जो लंबा अनुभव है उस आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि उनके व्यक्तित्व में “रीढ़” का अभाव है। और जिस व्यक्ति में रीढ़ नहीं होती, वह कभी सीधा खड़ा नहीं हो सकता। वह हर कठिन क्षण में रास्ता बदलता है, टकराव से बचता है, और अंततः समझौते को ही अपनी रणनीति बना लेता है।

ऐसे व्यक्तित्व में एक और प्रवृत्ति अक्सर दिखाई देती है—कायरता, जिसमें एक प्रकार की क्रूरता भी छिपी रहती है. जो सीधे टकराने की हिम्मत नहीं करता, वह अक्सर पीछे से वार करता है, अपने अधिकार और पद का इस्तेमाल करके असहमति रखने वालों को किनारे करता है।

जॉर्ज साहब, शरद यादव या दिग्विजय सिंह की कहानी याद कीजिए. जिन लोगों ने नीतीश कुमार को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनके साथ नीतीश कुमार ने क्या व्यवहार किया ! एक समय नीतीश कुमार किन लोगों के साथ राजनीति कर रहे थे और आज उनके अगल बगल कौन लोग दिख रहे हैं ! यह केवल साथियों का बदलाव नहीं है, यह नीतीश कुमार के राजनीति के स्तर और दिशा का भी पतन है। शिवानन्द”.

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रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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