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Electric Plasma Stove VS Induction: नई टेक्नोलॉजी का ‘जादू’ या महंगा सौदा? जानें कौन सा चूल्हा है आपके किचन के लिए सही

एक तरफ नई तकनीक वाला प्लाज्मा स्टोव है, जो बिना गैस के आग की लपट पैदा करने का दावा करता है, तो दूसरी तरफ इंडक्शन चूल्हा जो पहले से ही घरों में भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। दोनों को देखकर सवाल उठता है कि आखिर रसोई के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा सही...

Electric Plasma Stove VS Induction: नई टेक्नोलॉजी का ‘जादू’ या महंगा सौदा? जानें कौन सा चूल्हा है आपके किचन के लिए सही
Ramakant kumar
4 मिनट

Plasma Stove VS Induction Cooktop Efficiency: केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी द्वारा सोशल मीडिया पर दिखाए गए इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। बिना गैस के सिर्फ बिजली से आग की लपट पैदा करने वाली यह तकनीक लोगों को आकर्षित कर रही है। पहली नजर में यह किसी आधुनिक और भविष्य की रसोई का हिस्सा लगती है, लेकिन जब इसकी तुलना इंडक्शन चूल्हे से की जाती है, तो कई अहम सवाल सामने आते हैं।


कीमत में बड़ा अंतर

कीमत के मामले में दोनों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है। भारत में एक अच्छा इंडक्शन चूल्हा 2500 से 4500 रुपये के बीच आसानी से मिल जाता है। वहीं प्लाज्मा चूल्हा नई तकनीक होने के कारण 35 हजार से 45 हजार रुपये तक का होता है। अगर इसे विदेश से मंगाया जाए तो इसकी कीमत और बढ़कर 60 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में आम उपभोक्ता के लिए यह एक बड़ा निवेश साबित होता है।


टेक्नोलॉजी का अंतर

टेक्नोलॉजी के स्तर पर दोनों चूल्हों के काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है। प्लाज्मा चूल्हा हवा को आयोनाइज करके आग जैसी लपट पैदा करता है, जिससे खाना पकाया जाता है। यह तकनीक देखने में आकर्षक जरूर लगती है, लेकिन इसमें ऊर्जा का बड़ा हिस्सा रोशनी और ध्वनि के रूप में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत इंडक्शन चूल्हा मैग्नेटिक फील्ड के जरिए सीधे बर्तन को गर्म करता है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी बहुत कम होती है और खाना जल्दी तैयार होता है।


बिजली खपत का खेल

बिजली की खपत के मामले में भी इंडक्शन चूल्हा आगे नजर आता है। प्लाज्मा चूल्हा ज्यादा बिजली खर्च करता है और नियमित उपयोग में यह हर महीने 60 से 100 यूनिट तक अतिरिक्त बिजली खपत कर सकता है। वहीं इंडक्शन चूल्हा कम बिजली में ज्यादा काम करता है, जिससे यह लंबे समय में ज्यादा किफायती साबित होता है।


भारतीय रसोई की जरूरतों को देखें तो इंडक्शन चूल्हा ज्यादा व्यावहारिक विकल्प माना जाता है। हमारे यहां तेज आंच पर रोटी, सब्जी और तड़का बनाना आम बात है। इंडक्शन चूल्हा इस तरह के काम के लिए बेहतर नियंत्रण और स्थिरता प्रदान करता है। दूसरी ओर प्लाज्मा चूल्हे की आंच उतनी स्थिर नहीं होती, जिससे पारंपरिक भारतीय खाना बनाने में दिक्कत आ सकती है।


मेंटेनेंस और उपयोग

मेंटेनेंस के मामले में भी प्लाज्मा चूल्हा महंगा साबित हो सकता है। इसकी तकनीक नई होने के कारण इसके पार्ट्स और सर्विस आसानी से उपलब्ध नहीं होते। इसके उलट इंडक्शन चूल्हा लंबे समय से इस्तेमाल में है, इसलिए इसकी सर्विस और रिपेयरिंग आसानी से हो जाती है और खर्च भी कम आता है।


देखा जाए तो इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा तकनीकी रूप से आकर्षक जरूर है और भविष्य की एक झलक पेश करता है, लेकिन वर्तमान समय में यह आम लोगों के लिए न तो किफायती है और न ही पूरी तरह व्यावहारिक। वहीं इंडक्शन चूल्हा कम कीमत, कम बिजली खपत और बेहतर प्रदर्शन के कारण आज भी रसोई का सबसे भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है।

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