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रेलवे की ऐतिहासिक उपलब्धि: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को इस दिन हरी झंडी दिखा सकते हैं पीएम मोदी, जानिए.. क्या है खासियत?

India First Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाई जा सकती है। यह ट्रेन कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित परिवहन अभियान को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम है।

India First Hydrogen Train
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

India First Hydrogen Train: भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। इसे स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में रेलवे का बड़ा कदम माना जा रहा है।


इस हाइड्रोजन ट्रेन का पिछले करीब ढाई महीने से सोनीपत, जींद और नई दिल्ली के बीच अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण किया गया है। हाइड्रोजन से संचालित यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है, क्योंकि इसमें कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और इसके संचालन से मुख्य रूप से पानी की भाप निकलती है।


रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली पैदा की जाती है, जिससे ट्रेन की मोटर संचालित होती है। शुरुआती चरण में इस ट्रेन का परिचालन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच किया जाएगा। यह ट्रेन प्रतिदिन दो राउंड ट्रिप पूरी करेगी और करीब 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।


ट्रेन में कुल 10 कोच हैं, जिनमें दो ड्राइविंग पावर कार और आठ यात्री कोच शामिल हैं। इसमें 682 सीटों की व्यवस्था है, जबकि एक साथ करीब 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। रेलवे ने ट्रेन के संचालन के लिए जींद में हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन भी तैयार किया है, जिससे ट्रेन को स्थानीय स्तर पर ही ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा।


हाइड्रोजन ट्रेन की प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार 1,200 किलोवाट बिजली पैदा करने में सक्षम है, जो लगभग 1,600 हॉर्सपावर के बराबर है। ट्रेन में करीब 440 किलोग्राम कंप्रेस्ड हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है। इसकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, हालांकि जींद-सोनीपत रेलखंड पर इसे 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा। अधिकतम भार के साथ यह ट्रेन प्रतिदिन करीब 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत करेगी।


भारतीय रेलवे ने इस परियोजना के लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग सुविधा विकसित की है। ट्रेन के संचालन और रखरखाव से जुड़े मैनुअल को रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की मंजूरी मिल चुकी है।


रेलवे ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ट्रेन की डिजाइन और सुरक्षा परीक्षण अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी TUV SUD द्वारा किया गया है। हाइड्रोजन स्टोरेज स्टेशन पर लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और अन्य सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं। रिफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। प्रशिक्षित और प्रमाणित कर्मचारी इसके संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। शुरुआती दौर में तकनीकी विशेषज्ञ भी ट्रेन के साथ मौजूद रहेंगे।


इस परियोजना के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो रेल परिवहन में हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बाद भारत का यह कदम क्लीन एनर्जी आधारित रेल नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने और नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता