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UPI पेमेंट पर चार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्काल रोक से किया इनकार; केंद्र सरकार-RBI-NPCI को जारी किया नोटिस

Supreme Court News: 2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित MDR चार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, NPCI और अन्य संबंधित पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

Supreme Court News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Supreme Court News: 2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, RBI, NPCI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिका में दो हजार से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतानों पर लागू होने वाले नए शुल्क की वैधता को चुनौती दी गई है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है।



NPCI के नए ढांचे के अनुसार, 2,000 रुपए से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति लेनदेन रखी गई है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।



रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ क्षेत्रों में दो हजार से अधिक के लेनदेन के लिए 5 रुपए का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। वहीं, UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को MDR से छूट दी गई है।



सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने अदालत को बताया कि यह चार्ज सरकार द्वारा टैक्स या फीस के रूप में नहीं लिया जा रहा है। उनके अनुसार, यह भुगतान प्रणाली में शामिल बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स के बीच सेटलमेंट से जुड़ा शुल्क है। पीठ ने इस व्यवस्था के कानूनी और प्रशासनिक आधार को लेकर सवाल उठाए और संबंधित पक्षों से हलफनामे के जरिए तथ्य रखने को कहा।



अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर याचिका में नए MDR ढांचे को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यापारी भुगतानों पर शुल्क लगाने की व्यवस्था पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू की गई है। यह याचिका उस शून्य-MDR व्यवस्था में बदलाव को चुनौती देती है, जो जनवरी 2020 से UPI भुगतानों पर लागू थी।



सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई MDR व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। इसलिए अगली सुनवाई तक प्रस्तावित व्यवस्था पर न्यायालय की ओर से कोई तत्काल रोक प्रभावी नहीं है। 

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता