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CJP प्रदर्शन में बल प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पैलेट गन से लेकर पत्रकारों-वकीलों पर हमले तक... उठे गंभीर सवाल

Supreme Court Hearing: प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां मुख्य न्यायाधीश ने पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और प्रदर्शनकारियों, वकीलों व मीडिया कर्मियों पर कथित हमलों को लेकर कई गंभीर सवाल...

CJP प्रदर्शन में बल प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पैलेट गन से लेकर पत्रकारों-वकीलों पर हमले तक... उठे गंभीर सवाल
Ramakant kumar
4 मिनट

Supreme Court Hearing: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए गए कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया. इनमें पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन, प्रदर्शनकारियों, वकीलों और पत्रकारों पर कथित हमलों जैसे मुद्दे शामिल हैं.


सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अदालत में मौजूद रहे. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है. याचिकाओं में मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार में प्रदर्शन के दौरान हुई कथित घटनाओं का भी जिक्र किया गया है.


मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी याचिकाओं में कई समान मुद्दे उठाए गए हैं. उन्होंने विशेष रूप से उस आरोप का उल्लेख किया, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल से 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी जाने की बात कही गई है.


सुनवाई के दौरान अदालत ने इलेक्ट्रिक बैटन के कथित इस्तेमाल, एक युवती के गंभीर रूप से घायल होकर आईसीयू में भर्ती होने, वकीलों और एक पत्रकार पर कथित हमले जैसे आरोपों का भी जिक्र किया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने एक रिपोर्ट में पत्रकार पर कथित हमले की जानकारी देखी थी. इसके अलावा सादी वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा, महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ और एक महिला पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा कथित हमले से जुड़े आरोप भी याचिकाओं में शामिल हैं.


वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने भी पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एक अलग याचिका दाखिल की है. अदालत ने कहा कि इस मामले में मुद्दा स्पष्ट है. छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है.


मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है. साथ ही उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कई बार प्रदर्शनों में ऐसे लोग भी शामिल हो जाते हैं, जिनका मूल आंदोलन से कोई संबंध नहीं होता और बाद में वे खुद को आयोजकों के रूप में प्रस्तुत करने लगते हैं.


सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए कुछ पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इस पर अदालत ने सवाल किया कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जानी चाहिए. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मामलों के लिए नियम और दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी ढंग से पालन होना भी जरूरी है.


याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन स्थल पर सादी वर्दी में हथियारबंद लोग भी मौजूद थे. वहीं अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि कई वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी बिना नाम-पट्टिका के ड्यूटी पर तैनात थे. इन सभी आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.