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Success Story: पिता IAS बॉलीवुड बेटी एक्ट्रेस... फिर बनीं IAS अधिकारी, जानिए सिमाला प्रसाद की सफलता की कहानी

Success Story: 8 अक्टूबर 1980 को मध्य प्रदेश के भोपाल में जन्मी सिमाला प्रसाद आज देश की जाने-माने आईपीएस अफसरों में शुमार हैं। बेतूल जिले की पहली महिला एसपी बनने का गौरव भी उन्हें ही प्राप्त है।

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Success Story: 8 अक्टूबर 1980 को मध्य प्रदेश के भोपाल में जन्मी सिमाला प्रसाद आज देश की जाने-माने आईपीएस अफसरों में शुमार हैं। बेतूल जिले की पहली महिला एसपी बनने का गौरव भी उन्हें ही प्राप्त है। उनका नाम UPSC की सबसे कठिन परीक्षा में सफल होने वाले असाधारण प्रतिभाओं में लिया जाता है। साल 2010 में सिमाला ने UPSC परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण की, वह भी शानदार रैंक के साथ। इसके बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अपनी जगह बनाई और एक प्रेरणादायक करियर की शुरुआत की।


सिमाला ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसेफ कोएड स्कूल, भोपाल से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से बीकॉम की डिग्री हासिल की, जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन उन्होंने समाजशास्त्र (Sociology) में की। कॉलेज के दिनों से ही सिमाला कला, संस्कृति और अभिनय में रुचि रखती थीं। उनकी यही रुचि उन्हें बॉलीवुड तक ले गई, जहां उन्होंने 'आलिफ' और 'द नर्मदा स्टोरी' जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया।


सिविल सेवा की तैयारी कॉलेज के दिनों से ही शुरू कर चुकीं सिमाला ने UPSC की परीक्षा देने से पहले MPPSC परीक्षा पास की। इसके बाद उनका पहला पदभार डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के रूप में रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिमाला बैडमिंटन में भी माहिर थीं, लेकिन घुटने में लगी चोट के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा।


सिमाला प्रसाद अपनी मेहनत और लगन के बल पर न केवल पुलिस सेवा में बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। अपने सफर के बारे में वह बताती हैं कि सफलता पाने के लिए अपने सपनों के प्रति पूरी निष्ठा और मेहनत जरूरी होती है। उनके जीवन की यह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा स्रोत है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पित है।


सिमाला प्रसाद ने अपने प्रशासनिक कार्यों के दौरान महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। वे सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी सक्रिय रही हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर मेहनत और जुनून साथ हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

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