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हरियाणा सहित 3 राज्यों में नये राज्यपाल की नियुक्ति: लद्दाख से BD मिश्रा का इस्तीफा

हरियाणा, गोवा और लद्दाख में राज्यपाल बदले गए। पहली बार मोदी सरकार ने गठबंधन सहयोगी दल TDP के नेता को राज्यपाल नियुक्त किया है। हरियाणा में प्रो. असीम घोष ने बंडारू दत्तात्रेय की जगह ली।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 14, 2025, 5:01:54 PM

DELHI

तीन राज्यों में नए गवर्नर - फ़ोटो GOOGLE

DELHI: हरियाणा में राज्यपाल के तौर पर अब प्रोफेसर असीम कुमार घोष को नियुक्त किया गया है। वे बंडारू दत्तात्रेय की जगह लेंगे, जो वर्ष 2021 से इस पद पर कार्यरत थे। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दत्तात्रेय को अब केंद्र या किसी अन्य राज्य में क्या नई जिम्मेदारी दी जाएगी। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इनकी नियुक्ति की जानकारी दी है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।



हरियाणा और गोवा में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा लद्दाख में भी फेरबदल किया गया है। कविंद्र गुप्ता लद्दाख के उपराज्यपाल होंगे, जबकि अब तक एलजी रहे ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। हरियाणा में अब प्रोफेसर असीम कुमार घोष राज्यपाल होंगे। यही नहीं गोवा में गजपति राजू को राज्यपाल बनाकर भेजा गया है। बता दें कि बंडारू दत्तात्रेय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रहे हैं, ने अपने कार्यकाल के दौरान राज्य में कई संवैधानिक और प्रशासनिक दायित्वों को निभाया। उनकी जगह लेने वाले प्रोफेसर असीम कुमार घोष एक शिक्षाविद् हैं और विभिन्न अकादमिक तथा संस्थागत भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।


इस बदलाव के साथ ही गोवा में एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के वरिष्ठ नेता गजपति राजू को गोवा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह निर्णय राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब मोदी सरकार ने अपने गठबंधन सहयोगी दल के किसी नेता को राज्यपाल का पद सौंपा है।


अब तक भाजपा सरकार की नीति यह रही है कि राज्यपालों की नियुक्ति मुख्य रूप से पार्टी के नेताओं, पूर्व नौकरशाहों या सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में से की जाती रही है। गजपति राजू की नियुक्ति इस परंपरा से हटकर की गई पहली पहल है, जो यह संकेत देती है कि केंद्र सरकार अब राजनीतिक संतुलन और गठबंधन सहयोगियों के प्रति विश्वास दर्शाने के लिए अपने दृष्टिकोण में बदलाव कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावों और क्षेत्रीय दलों के साथ बेहतर समन्वय के मद्देनज़र उठाया गया है, ताकि एनडीए गठबंधन को अधिक मजबूती मिल सके।