1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 10 Nov 2025 02:53:51 PM IST
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Jawaharlal Nehru Stadium : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देश की अब तक की सबसे बड़ी खेल परियोजना की तैयारी शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय ने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को पूरी तरह तोड़कर उसकी जगह पर अत्याधुनिक ‘स्पोर्ट्स सिटी’ बनाने की योजना को हरी झंडी दे दी है। यह नई स्पोर्ट्स सिटी लगभग 102 एकड़ जमीन में फैली होगी और इसे कतर और ऑस्ट्रेलिया के आधुनिक खेल मॉडलों के आधार पर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल केंद्र बनाना और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराना है।
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम का होगा पुनर्निर्माण
दिल्ली के हृदय क्षेत्र में स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, जिसने 1982 के एशियाई खेलों से लेकर 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स तक कई ऐतिहासिक आयोजनों की मेजबानी की है, अब नई पहचान पाने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा स्टेडियम को पूरी तरह ध्वस्त कर एक नई “इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स सिटी” के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें न केवल ओलंपिक स्तर की खेल सुविधाएं होंगी, बल्कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, रहने और फिटनेस से जुड़ी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी व्यवस्था की जाएगी।
कतर और ऑस्ट्रेलिया मॉडल से ली जाएगी प्रेरणा
खेल मंत्रालय इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल रहे मॉडलों के अनुरूप तैयार करना चाहता है। इसके लिए मंत्रालय की टीमें कतर के दोहा स्पोर्ट्स सिटी (Aspire Zone) और ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट स्पोर्ट्स प्रिसिंक्ट जैसे प्रोजेक्ट्स का अध्ययन कर रही हैं। इन देशों ने हाल के वर्षों में खेल बुनियादी ढांचे को विश्वस्तर पर विकसित कर उदाहरण पेश किया है। मंत्रालय इन मॉडलों से सीख लेकर भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार डिजाइन को अंतिम रूप देगा।
क्या होगी नई ‘स्पोर्ट्स सिटी’ में खास बातें
नई दिल्ली की यह स्पोर्ट्स सिटी भारत की अब तक की सबसे आधुनिक खेल परियोजनाओं में से एक होगी। इसमें शामिल होंगी—मल्टी-स्पोर्ट एरिना: फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स, स्विमिंग, जिमनास्टिक्स और इनडोर गेम्स के लिए अत्याधुनिक स्टेडियम। ओलंपिक लेवल ट्रेनिंग सेंटर: खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए विश्वस्तरीय कोचिंग, जिम, स्पोर्ट्स साइंस लैब और हाइटेक मेडिकल सुविधाएं।
खिलाड़ियों के लिए रेजिडेंशियल जोन: स्पोर्ट्स विलेज की तर्ज पर आवासीय परिसर, हॉस्टल और रिकवरी सेंटर। स्पोर्ट्स बिजनेस और रिसर्च हब: खेल प्रबंधन, नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान केंद्र। ग्रीन और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर: पर्यावरण के अनुकूल निर्माण तकनीक, सोलर एनर्जी और वाटर रीसाइक्लिंग सिस्टम।
राजधानी में खेल पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा
खेल मंत्रालय का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली न सिर्फ भारत का बल्कि दक्षिण एशिया का स्पोर्ट्स कैपिटल बनकर उभरेगा। इससे न केवल खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मंच मिलेगा बल्कि खेल पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके अलावा, यह स्पोर्ट्स सिटी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स की मेजबानी करने में सक्षम होगी, जिससे भारत की वैश्विक खेल पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी।
भविष्य की दिशा
सूत्रों के अनुसार, परियोजना का प्रेजेंटेशन और प्रारंभिक डिजाइन तैयार किया जा चुका है। अब इसकी फाइनल रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और वित्त मंत्रालय को भेजी जाएगी। उम्मीद है कि 2026 की शुरुआत तक इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
इस परियोजना के पूरा होने पर दिल्ली को मिलेगा एक नया विश्वस्तरीय खेल केंद्र, जो भारत के खेल बुनियादी ढांचे की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, जो कभी देश के खेल गौरव का प्रतीक था, अब आधुनिक भारत की ‘स्पोर्ट्स सिटी’ के रूप में नई पहचान पाएगा।