1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 27, 2026, 8:11:40 AM
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा ने गुरुवार को राज्य के निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों पर लगाम कसने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस नए कानून के लागू होने के बाद अब राज्य के सभी निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों से लिए जाने वाले विभिन्न मदों के शुल्क का निर्धारण सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति करेगी। इसका उद्देश्य मनमाने ढंग से फीस वसूली पर रोक लगाना और छात्रों व अभिभावकों को राहत देना है।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, नामांकन से लेकर परीक्षा तक की पूरी शुल्क संरचना समिति तय करेगी। इसमें शिक्षण शुल्क, पुस्तकालय शुल्क, प्रयोगशाला शुल्क, कंप्यूटर शुल्क, कॉशन मनी, परीक्षा शुल्क और छात्रावास शुल्क जैसे सभी मद शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त यदि कोई अन्य शुल्क राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकार द्वारा अनुशंसित होगा, तो उसे भी समिति की स्वीकृति के बाद ही लागू किया जा सकेगा। राज्य सरकार यह भी अधिसूचित करेगी कि किन-किन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को समिति के दायरे में रखा जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कोई भी निजी संस्थान समिति द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि विद्यार्थियों से नहीं वसूल सकेगा। यदि कोई संस्थान तय सीमा से अधिक शुल्क लेता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त वसूली गई राशि विद्यार्थियों को लौटानी होगी और गंभीर मामलों में संबंधित संस्थान की सीटों में कटौती भी की जा सकती है। इससे निजी कॉलेजों और संस्थानों द्वारा की जाने वाली मनमानी पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
विधेयक के तहत गठित होने वाली समिति का अध्यक्ष कोई प्रख्यात शिक्षाविद् या सेवानिवृत्त पदाधिकारी होगा, जिसका पद प्रधान सचिव से नीचे का नहीं होगा। समिति का गठन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जाएगा, ताकि शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित रहे।
इसके अलावा कानून में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी छात्र को पाठ्यक्रम में प्रवेश देने या उसमें बने रहने के लिए किसी भी प्रकार का कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि कोई संस्थान या उसका प्रबंधन ऐसा करता है, तो वह दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आएगा। यह प्रावधान विशेष रूप से उन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है, जिनमें निजी संस्थानों द्वारा प्रवेश के नाम पर मोटी रकम वसूले जाने के आरोप लगते रहे हैं।
गौरतलब है कि गुरुवार को विधानसभा में कुल छह विधेयकों पर मुहर लगी। इनमें बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड (संशोधन) विधेयक, बिहार जनविश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, बिहार अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक और बिहार सचिवालय सेवा (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। भोजनावकाश के बाद महज 47 मिनट की सामान्य चर्चा के पश्चात इन विधेयकों को पारित कर दिया गया।
इसी क्रम में बिहार अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक को भी मंजूरी दी गई, जिसके तहत अधिवक्ता कल्याण निधि में जमा की जाने वाली राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दी गई है। इस निर्णय से राज्य के अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे और उन्हें सामाजिक सुरक्षा संबंधी योजनाओं में बेहतर सहायता मिल सकेगी।
कुल मिलाकर, निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की फीस नियंत्रण से जुड़ा यह कानून छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि समिति के गठन और उसके निर्णयों के बाद इसका क्रियान्वयन किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया जाता है।