Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार गठन की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। किसी भी पार्टी या गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है।
सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीती हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 के बहुमत के आंकड़े से वह अभी भी 10 सीटें पीछे है। TVK प्रमुख विजय लगातार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन राज्यपाल ने अब तक 118 विधायकों के समर्थन के ठोस प्रमाण के साथ आने को कहा है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, राज्यपाल ने TVK के दावों पर कानूनी राय भी मांगी है और प्रस्तुत किए गए आंकड़ों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इसी कारण सरकार गठन और शपथ ग्रहण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
TVK के पास सरकार बनाने का सबसे सरल विकल्प यह है कि वह 118 विधायकों के समर्थन वाले हस्ताक्षरित पत्र राज्यपाल को सौंपे। यदि राज्यपाल इनसे संतुष्ट होते हैं, तो वे TVK को सरकार बनाने का आमंत्रण दे सकते हैं। इसके बाद विधानसभा में फ्लोर टेस्ट जरूरी होगा।
संविधान के अनुच्छेद 174 और 175(2) के तहत राज्यपाल के पास सदन बुलाने और विश्वास मत प्राप्त करने का निर्देश देने का अधिकार होता है। वर्तमान में TVK के पास कांग्रेस के समर्थन सहित लगभग 112 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है।
TVK अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कांग्रेस, वीसीके और अन्य दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। वीसीके के दो विधायक हैं और वह बैठक कर यह तय करेगा कि वह किसे समर्थन देगा। हालांकि वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने पहले ही संकेत दिया है कि वे डीएमके का समर्थन जारी रखेंगे।
यदि राज्यपाल TVK के दावे से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 के तहत अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए दूसरे सबसे बड़े दल डीएमके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।
बता दें कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक सीट जीतने वाली थलपति विजय की टीवीके बहुमत से अब भी चंद कदम दूर है। उन्होंने राज्यपाल अर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था लेकिन राज्यपाल ने 118 विधायकों का समर्थन पत्र मांगा।
विजय ने दोबारा राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया लेकिन इस बार भी राज्यपाल ने 118 विधायकों का हस्ताक्षर लेकर आने को कहा और लौटा दिया। ऐसे में तमिलनाडु में सरकार गठन पर फिलहाल सस्पेंस बरकार है और सभी की नजर राज्यपाल पर है।

