सगाई के बाद फोन पर अकेले बात नहीं करेंगे मंगेतर, इस समाज का अनोखा फैसला

सेन समाज ने सगाई के बाद मंगेतरों के फोन पर अकेले बातचीत करने और शादी में दूल्हे का जूता छिपाने जैसी परंपराओं पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 19 Feb 2026 08:22:17 PM IST

बिहार न्यूज

दूल्हे का जूता छिपाने की रस्म पर भी प्रतिबंध - फ़ोटो सोशल मीडिया

DESK: सगाई के बाद लड़का और लड़की अब फोन पर अकेले में बात नहीं कर सकेंगे और ना ही दुल्हन की बहनें शादी में दूल्हे का जूता छिपा पाएंगी। इस अनोखे फैसले से हर कोई हैरान हैं, अब लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दे रहे हैं। 


दरअसल छत्तीसगढ़ के सेन समाज ने सगाई के बाद टूटते रिश्तों को देखते हुए मंगेतर से फोन पर अकेले में बात करने पर पाबंदी लगा दी है। सेन समाज ने यह भी फैसला लिया कि दुल्हन की बहनें अब शादी के दौरान दूल्हे का जूता भी नहीं छिपा पाएंगी।


बता दें कि छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले सेन समाज की आबादी करीब सवा दो लाख है। इस समाज के करीब 70 फीसदी लोग सैलून का कार्य करते हैं। सेन समाज के बालोद जिले के अध्यक्ष संतोष कौशिक ने बताया कि मंगलवार को समुदाय की जिला स्तरीय बैठक में कई नए नियम बनाए गए। मीटिंग में फैसला लिया गया कि अब मंगेतर सगाई के बाद फोन कॉल पर एक-दूसरे से अकेले में बात नहीं कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर बातचीत माता-पिता की उपस्थिति में ही होगी।


बालोद जिले के अध्यक्ष संतोष कौशिक ने बताया कि जांच में पाया गया कि मोबाइल पर लंबी बातचीत के दौरान हुए विवाद के कारण कई रिश्ते टूट रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। समाज के प्रदेश संगठन मंत्री गौरी शंकर श्रीवास ने कहा कि फिलहाल यह नियम बालोद जिले में लागू किया गया है और जल्द ही इसे पूरे प्रदेश में लागू करने पर विचार किया जाएगा।


बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि अब शादी समारोह में दुल्हन की बहनें दूल्हे का जूता नहीं छिपा सकेंगी, क्योंकि इस रस्म के दौरान कई बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा सगाई में सीमित संख्या में लोगों की उपस्थिति, विवाह में शुभ मुहूर्त का पालन और प्लास्टिक की जगह पत्तल में भोजन परोसने जैसे निर्णय भी लिए गए हैं। समाज ने यह भी तय किया है कि यदि कोई सदस्य अन्य धर्म अपनाता है तो उसके साथ रोटी-बेटी का संबंध समाप्त कर दिया जाएगा। इन फैसलों को लेकर नई पीढ़ी की राय सामने आई है। कुछ लोग इसे पारिवारिक और सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि विवाह से पहले आपसी संवाद जरूरी है, ताकि जीवनसाथी एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें।