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Bihar IAS News: कौन हैं बिहार कैडर की यह महिला IAS अफसर, जिन्हें UPSC में मिली बड़ी जिम्मेदारी? जानें...

Bihar IAS News: IAS सुजाता चतुर्वेदी, 1989 बिहार कैडर की अधिकारी, जिन्हें रिटायरमेंट से दो महीने पहले UPSC सदस्य नियुक्त किया गया है। जानें उनके करियर और इस नियुक्ति की खासियत...

Bihar IAS News:
IAS सुजाता चतुर्वेदी
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar IAS News: भारत सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को वरिष्ठ IAS अधिकारी सुजाता चतुर्वेदी को UPSC का सदस्य नियुक्त किया है, जो उनके 35 साल के शानदार प्रशासनिक करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। 1989 बैच की बिहार कैडर की यह अधिकारी 30 जून 2025 को रिटायर होने वाली थीं, लेकिन रिटायरमेंट से ठीक पहले मिली यह जिम्मेदारी उनके अनुभव और नेतृत्व को अच्छी तरह से रेखांकित करती है। 1 मई 2025 को नई दिल्ली में लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, जो कि UPSC के वरिष्ठतम सदस्य हैं, उन्होंने सुजाता चतुर्वेदी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।


सुजाता चतुर्वेदी का जन्म और शिक्षा महाराष्ट्र में हुई। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक और इतिहास में स्नातकोत्तर किया। इसके अलावा, उनके पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एम.फिल और रूसी भाषा में डिप्लोमा भी है। 1989 में IAS में चयन के बाद उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ, जहां उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। बिहार में इनके योगदान की बात करें तो सुजाता चतुर्वेदी इस राज्य में वित्त विभाग की पहली महिला प्रधान सचिव बनीं। उन्होंने वाणिज्यिक कर आयुक्त, शहरी विकास विभाग के उपाध्यक्ष, और वित्त विभाग की सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं। उनकी नीतिगत दूरदर्शिता और प्रशासनिक कुशलता ने बिहार के विकास में अहम भूमिका निभाई।


जबकि केंद्र सरकार में उन्होंने खेल सचिव, युवा मामले और खेल मंत्रालय की सचिव, और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में काम किया। इसके अलावा, वे यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया में उप महानिदेशक भी रहीं। बात करें खेल क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों की तो खेल सचिव के रूप में सुजाता ने खेलो इंडिया गेम्स, FIDE शतरंज ओलंपियाड, FIFA U-17 महिला विश्व कप, राष्ट्रीय खेल भंडारण प्रणाली, और देशव्यापी खेल सुविधाओं के मानचित्रण जैसे महत्वपूर्ण पहलों को नेतृत्व दिया। उन्होंने एंटी-डोपिंग बिल को लागू करने में भी अहम भूमिका निभाई, जिसने भारत के खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत किया।


आपको बताते चलें कि UPSC में सदस्यों की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316(1) के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। अनुच्छेद 316(2) के अनुसार, सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, तक होता है। सेवा शर्तें UPSC विनियम 1969 द्वारा नियंत्रित होती हैं। UPSC, जो IAS, IFS, IPS जैसे अधिकारियों के चयन के लिए सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है, एक अध्यक्ष और अधिकतम 10 सदस्यों द्वारा संचालित होता है। सुजाता की नियुक्ति के बाद UPSC में अभी तीन सदस्यों की रिक्तियां बाकी हैं।सुजाता चतुर्वेदी की नियुक्ति 1 मई 2025 से प्रभावी हुई, और उनका कार्यकाल उनके 65 वर्ष की आयु तक या 6 वर्ष तक होगा। 

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