Bihar Human Rights News: बिहार में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के गठन के बाद से राज्य में अब तक 1,22,954 शिकायतें दर्ज की गई हैं. इन आंकड़ों के आधार पर बिहार देश में तीसरे स्थान पर है. इस सूची में उत्तर प्रदेश पहले और दिल्ली दूसरे स्थान पर है. बिहार में सबसे ज्यादा शिकायतें पटना जिले से मिली हैं, जहां अब तक 12,792 मामले दर्ज किए गए हैं.
पुलिस के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें
बिहार में दर्ज मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों में पुलिस के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस से संबंधित 35,902 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से 35,285 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि 617 मामले अब भी लंबित हैं.
महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़ी 8,899 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें 8,716 मामलों का निपटारा किया गया. वहीं, बाल अपराध से संबंधित 1,891 शिकायतें सामने आईं. आंकड़ों में जेल में बंदियों की मौत के 4,311 मामले और पुलिस लॉकअप में मौत के 238 मामले भी दर्ज हैं. इसके अलावा शेल्टर होम और सुधार गृहों में बंद लोगों की मौत के 19 मामले सामने आए हैं.
पटना में सबसे ज्यादा 12,792 शिकायतें
जिलावार आंकड़ों में पटना सबसे ऊपर है. यहां मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी कुल 12,792 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से 12,490 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि 302 मामले लंबित हैं.
पटना के बाद मुजफ्फरपुर में 7,925, समस्तीपुर में 6,868 और गया में 6,728 शिकायतें दर्ज की गईं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के अलग-अलग जिलों में मानवाधिकार से जुड़े मामलों को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें आयोग तक पहुंची हैं.
विशेष सुनवाई में 65 मामलों का निपटारा
पटना के ज्ञान भवन में 7 और 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की विशेष सुनवाई आयोजित की गई. इस दौरान कुल 70 मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया, जिनमें से 65 का निपटारा किया गया. सुनवाई के बाद पीड़ितों या उनके आश्रितों को 1.50 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया.
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने कहा कि जेल और पुलिस लॉकअप में बंदियों की मौत मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा मामला है. सुनवाई के दौरान नौबतपुर के सचिन की बेउर जेल में मौत का मामला भी सामने आया. जानकारी के अनुसार, समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हुई थी. इस मामले में उसके आश्रितों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया.
बिहार के अधिकारियों से भी मांगा गया जवाब
बिहार में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े कुछ मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है. भारती तिवारी मामले में मुख्य सचिव और डीजीपी से जवाब तलब किया गया था. वहीं, रोशन आनंद के मामले में पटना के एसएसपी को जवाब देने के लिए बुलाया गया था.
पटना में हुई दो दिवसीय कैंप सिटिंग और खुली सुनवाई के दौरान बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम, पुलिस और न्यायिक हिरासत में मौत तथा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई. आयोग ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का ब्योरा मांगा और पीड़ितों को राहत देने में लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के HRCNet पोर्टल के माध्यम से पीड़ित ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा डाक, फैक्स और ई-मेल से मिलने वाली शिकायतों का भी पंजीकरण किया जाता है. शिकायत दर्ज होने से लेकर सुनवाई की तारीख और बेंच आवंटन तक की जानकारी मोबाइल पर एसएमएस के जरिए दी जाती है.
आयोग गंभीर समाचारों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर भी मामलों की जांच कर सकता है. जरूरत पड़ने पर विशेष जांच दल मौके पर जाकर तथ्यों की पड़ताल करता है.
आयोग ने थानों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, महिलाओं के लिए अलग हाजत बनाने, बंदियों के भोजन भत्ते में बढ़ोतरी और अधिकारियों को नोडल पदाधिकारी नियुक्त करने जैसे सुझाव भी दिए हैं. इसके अलावा अवैध नर्सिंग होम, फर्जी पैथोलॉजी लैब और महिलाओं के अवैध गर्भाशय निकालने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की अनुशंसा की गई है.




