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Bihar MLA flat system : पटना में विधायकों के फ्लैटों की नई व्यवस्था, अब निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से होगा आवंटन; जानिए क्यों आया यह आदेश

पटना में विधायकों के फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब हर विधायक को उसका आवास निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से मिलेगा। इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और फ्लैटों का सही तरीके से बंटवारा सुनिश्चित होगा।

Bihar MLA flat system : पटना में विधायकों के फ्लैटों की नई व्यवस्था, अब निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से होगा आवंटन; जानिए क्यों आया यह आदेश
Tejpratap
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Bihar MLA flat system : राजधानी पटना में बिहार विधानसभा से जुड़े विधायकों के फ्लैट आवंटन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब विधायकों को मिलने वाला आवास उनके निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से तय किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत हर विधायक के फ्लैट के बाहर उस क्षेत्र का सीरियल नंबर प्लेट लगाया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट रहेगा कि कौन-सा आवास किस क्षेत्र के लिए निर्धारित है। इस कदम का मकसद फ्लैट आवंटन में पारदर्शिता लाना और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकना है।


बिहार विधानसभा सचिवालय के अनुसार, अब पटना में बने विधायक फ्लैटों पर संबंधित विधानसभा क्षेत्र का नाम और क्रमांक अंकित रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि अगले चुनाव में यदि कोई नया विधायक चुना जाता है, तो उसे उसी क्षेत्र से जुड़ा फ्लैट मिलेगा। यानी, अब आवास का संबंध विधायक की पार्टी से नहीं, बल्कि उसके निर्वाचन क्षेत्र से होगा।


उदाहरण के तौर पर, सुलतानगंज से जेडीयू विधायक ललित नारायण मंडल का जो फ्लैट अभी है, वह अब सिकंदरा से जीतने वाले विधायक को दिया जाएगा। इसी तरह घोषी के विधायक रामबली सिंह यादव का फ्लैट अब बेलागंज से चुने गए विधायक को मिलेगा। मोरवा से आरजेडी विधायक रणविजय साहू का आवास अब टिकारी से आने वाले विधायक को मिलेगा, जबकि राजद के रामवृक्ष सदा का फ्लैट चकाई क्षेत्र के नए विजेता को दिया जाएगा। वहीं बीजेपी के नारायण प्रसाद का फ्लैट अब झाझा से जीतने वाले विधायक को आवंटित किया जाएगा।


इस नए सिस्टम से विधानसभा सचिवालय का मानना है कि न केवल फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया सुगम होगी, बल्कि इसमें पारदर्शिता भी बढ़ेगी। पहले जहां कई बार विधायकों के बीच फ्लैट को लेकर विवाद या असंतोष की स्थिति बन जाती थी, वहीं अब इस नई व्यवस्था से वह समाप्त हो जाएगी।


बिहार सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव लंबे समय से विचाराधीन था। कई विधायकों ने शिकायत की थी कि पटना में उनके आवासों के चयन में मनमानी होती है। अब निर्वाचन क्षेत्र आधारित प्रणाली लागू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी। साथ ही, इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि किसी क्षेत्र के विधायक को अगली बार वही आवास स्वतः मिल जाएगा, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया में भी स्थिरता आएगी।


नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पटना में सभी विधायक आवासों की नंबरिंग और नामपट्टियों का कार्य शुरू हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि अगले विधानसभा सत्र से पहले सभी फ्लैटों पर क्षेत्रवार नाम और क्रमांक अंकन का कार्य पूरा कर लिया जाए।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से विधायकों के बीच पारदर्शिता और समानता का संदेश जाएगा। साथ ही, विधानसभा सचिवालय की साख भी मजबूत होगी। बिहार में यह प्रयोग अपने आप में अनोखा है और संभव है कि अन्य राज्यों में भी इसे एक मॉडल के रूप में अपनाया जाए।