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NEET student death : सम्राट चौधरी ने DGP से SP तक से पूछा ‘देरी क्यों?’ कहा —अफसरशाही रवैया छोड़ें

पटना गर्ल्स हॉस्टल NEET छात्रा मौत–दुष्कर्म मामले में पुलिस की सुस्ती पर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने DGP समेत शीर्ष अधिकारियों को तलब किया।

NEET student death : सम्राट चौधरी ने DGP से SP तक से पूछा ‘देरी क्यों?’ कहा —अफसरशाही रवैया छोड़ें
Tejpratap
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4 मिनट

NEET student death : राजधानी पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और कथित दुष्कर्म के मामले ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संवेदनशील मामले में पुलिस की धीमी जांच और शीर्ष स्तर पर लापरवाही को लेकर उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।


सूत्रों के मुताबिक, पूरे मामले में शुरुआती स्तर से ही पुलिस की गंभीर चूक सामने आई है। बावजूद इसके, जिम्मेदारी केवल जूनियर अधिकारियों पर डालने की कोशिश किए जाने से गृह मंत्री और अधिक नाराज हो गए। हालात इतने गंभीर हो गए कि रविवार को अवकाश के दिन भी सम्राट चौधरी ने पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर लिया।


बताया जाता है कि गृह मंत्री ने डीजीपी विनय कुमार, आईजी सेंट्रल रेंज, एसएससी पटना, पटना सिटी एसपी और मामले से जुड़े संबंधित सीडीपीओ को पांच देशरत्न मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर बुलाकर कड़ी फटकार लगाई। बैठक के दौरान गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के गंभीर अपराधों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


सूत्र बताते हैं कि सम्राट चौधरी ने कुछ दिन पहले ही डीजीपी विनय कुमार को इस मामले की सीधी निगरानी करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि मामले का शीघ्र खुलासा कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और समाज में एक सख्त संदेश जाए। इसके बावजूद अब तक न तो मामले का कोई ठोस खुलासा हो पाया है और न ही जांच किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकी है।


फोरेंसिक रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों से आपत्तिजनक साक्ष्य मिलने के बाद कथित दुष्कर्म की आशंका और भी गहरी हो गई है। इसके बावजूद पुलिस की ओर से अब तक किसी बड़े आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे न केवल पीड़िता के परिजनों में आक्रोश है, बल्कि आम जनता में भी भारी रोष देखा जा रहा है।


गृह मंत्री ने बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि अगर जांच में यह पाया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही या गलत निर्णय के कारण मामले में देरी हुई है, तो उनके खिलाफ भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि “कुर्सी बड़ी हो या छोटी, जिम्मेदारी तय होगी।”


इस मामले में पुलिस पर यह भी आरोप लग रहा है कि शुरुआती दौर में घटनास्थल को ठीक से सील नहीं किया गया, साक्ष्य जुटाने में देरी हुई और पीड़िता के परिजनों से समय पर समुचित संवाद नहीं किया गया। यही वजह है कि अब यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल बन गया है।


राज्य सरकार इस घटना को लेकर लगातार दबाव में है। विपक्षी दल भी सरकार और पुलिस पर हमलावर हैं और इसे महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बता रहे हैं। वहीं, गृह मंत्री की सख्ती के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है। फिलहाल, पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार और पुलिस मिलकर पीड़िता को समय पर न्याय दिला पाएगी या यह मामला भी लंबी जांच और फाइलों में दबकर रह जाएगा।