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BJP Campaign: चुनाव बिहार में है, भाजपा 1000 KM दूर प्रचार क्यों कर रही?

BJP Campaign: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बीजेपी ने हरियाणा में प्रचार तेज कर दिया है। इसके पीछे वजह बहुत बड़ी है और इसका असर बिहार विधानसभा चुनाव पर गहरा पड़ेगा।

BJP Campaign
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

BJP Campaign: बिहार में अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच BJP ने करीब 1,000 किलोमीटर दूर हरियाणा में प्रचार शुरू कर सियासी हलचल मचा दी है। पार्टी ने हरियाणा के 12 जिलों (फरीदाबाद, गुरुग्राम, अंबाला, हिसार, झज्जर, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, रेवाड़ी, सोनीपत, और यमुनानगर) में बिहार से आए प्रवासी मतदाताओं को साधने की रणनीति बनाई है। इन जिलों में बिहारी प्रवासियों की संख्या काफी ज्यादा है और ये लोग बिहार में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। बीजेपी का लक्ष्य इन प्रवासियों को वापस बिहार लाकर अपने पक्ष में वोटिंग बढ़ाना है।


बीजेपी ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत हरियाणा में बिहारी प्रवासियों से संपर्क शुरू किया है। पार्टी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं की टीमें गठित की हैं, जो इन 12 जिलों में प्रवासियों की पहचान कर रही हैं। इनमें मजदूर, छोटे व्यापारी और अन्य पेशेवर शामिल हैं, जो बिहार के ग्रामीण और शहरी इलाकों से हरियाणा में काम के लिए आए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिहार की 243 विधानसभा सीटों में प्रत्येक सीट पर औसतन 15,000-20,000 प्रवासी मतदाता हैं। अगर बीजेपी हर सीट से 5,000 प्रवासियों को भी वोटिंग के लिए बिहार ला पाती है, तो यह वोटिंग प्रतिशत को 2-3% तक बढ़ा सकता है, जो कांटे की टक्कर वाली सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है।


हरियाणा बीजेपी ने छठ पूजा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी शुरू की है। पिछले साल गुरुग्राम और फरीदाबाद में छठ पूजा के दौरान बीजेपी नेताओं ने घाटों पर सुविधाएं मुहैया कराईं, जैसे पानी, लाइटिंग, और सुरक्षा व्यवस्था, जिससे प्रवासी समुदाय में पार्टी की पैठ बढ़ी। पार्टी ने प्रवासी समुदाय के प्रभावशाली चेहरों, जैसे सामुदायिक नेताओं और छोटे संगठनों के प्रतिनिधियों, को भी अपने साथ जोड़ा है।


डेटा संग्रह और चुनौतियां

बीजेपी की राज्य महासचिव अर्चना गुप्ता ने बताया कि पार्टी प्रवासियों का डेटा जुटा रही है, लेकिन यह काम चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि प्रवासी समुदाय व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में लाखों बिहारी मजदूर फैक्ट्रियों, निर्माण क्षेत्र, और सेवा उद्योग में काम करते हैं। हिसार और यमुनानगर में भी कृषि और छोटे उद्योगों में बिहारी प्रवासियों की अच्छी-खासी संख्या है।


अर्चना ने कहा कि अगले दो महीनों में पार्टी बड़ा डेटा तैयार कर लेगी, जिसके आधार पर प्रवासियों को बिहार लौटने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हालांकि, इस रणनीति में कई चुनौतियां हैं। प्रवासियों को बिहार लौटने के लिए समय, यात्रा खर्च और नियोक्ताओं से छुट्टी जैसी समस्याएं हैं। इसके अलावा, प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में काम करता है, जिससे उनका डेटा जुटाना मुश्किल है। बीजेपी ने इसके लिए स्थानीय पंचायतों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और बिहारी सांस्कृतिक संगठनों से संपर्क बढ़ाया है।

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