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Bihar Politics: चिराग से समझौता तो मांझी और कुशवाहा के लिए बनेगा यह फार्मूला, NDA में इस शर्त पर हो सकता है सीटों का बंटवारा; जानिए अंदरखाने की चर्चा

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है। अब एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है। भाजपा, जेडीयू और छोटे सहयोगी दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान की सीटों की मांग से गठबंधन का फार्मूला अटक

NDA Seat Sharing
NDA Seat Sharing
© FILE PHOTO
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का ऐलान बीते शाम हो चुका है। जैसे ही चुनाव की तारीखें घोषित हुईं, राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन में अब सबसे बड़ी चर्चा सीट बंटवारे को लेकर है। भाजपा, जेडीयू, हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा), आरएलएसपी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बीच सीटों का समीकरण अभी तक तय नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो इस देरी की वजह चिराग पासवान हैं, जो कुछ सीटों को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं।


बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में एनडीए गठबंधन के भीतर अब तक सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी है। भाजपा और जेडीयू दोनों ही पार्टियां चाहती हैं कि वे मिलकर करीब 205 सीटों पर चुनाव लड़ें। इसका मतलब यह हुआ कि बाकी 38 सीटें छोटे दलों  चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास), उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी और जीतन राम मांझी की हम  के बीच बांटी जाएंगी। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से चिराग पासवान को 25 सीटों, उपेंद्र कुशवाहा को 6 सीटों और जीतन राम मांझी को 7 सीटों का ऑफर दिया गया है। लेकिन चिराग पासवान इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। वे सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ कुछ खास क्षेत्रों में अपनी दावेदारी चाहते हैं, जहां उनका जनाधार मजबूत है।


सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान चाहते हैं कि उन्हें कम से कम 30 सीटें दी जाएं। उनका तर्क है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का प्रभाव कई जिलों में है, खासतौर पर समस्तीपुर, खगड़िया, जमुई, और औरंगाबाद जैसी सीटों पर। वे चाहते हैं कि पार्टी को इन इलाकों में मजबूत उपस्थिति बनाए रखने का मौका दिया जाए। लेकिन भाजपा के सामने दिक्कत यह है कि अगर चिराग की सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो जीतन मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की सीटें कम करनी पड़ेंगी। यही वजह है कि भाजपा कोई ठोस फैसला लेने से बच रही है।


भाजपा रणनीतिकारों के मुताबिक, यदि छोटे दलों को कम सीटें दी जाती हैं, तो उन्हें राज्यसभा या विधान परिषद में प्रतिनिधित्व देकर संतुष्ट किया जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा को पहले ही भाजपा ने राज्यसभा भेजा है, इसलिए अब यह विकल्प जीतन राम मांझी या चिराग पासवान के लिए खुला हो सकता है। भाजपा के भीतर चर्चा चल रही है कि यदि सीटों का बंटवारा लेकर कोई असंतोष उत्पन्न होता है, तो चुनाव बाद उन्हें मंत्री पद या अन्य  महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर मनाया जा सकता है।


भाजपा और जेडीयू इस बार मिलकर करीब 205 सीटों पर लड़ना चाहते हैं, जिनमें भाजपा के हिस्से में लगभग 102 सीटें, जबकि जेडीयू के हिस्से में 103 सीटें आ सकती हैं। शेष 38 सीटों का वितरण छोटे सहयोगियों के बीच होगा। भाजपा की योजना है कि वह इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़े, जबकि छोटे दलों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में सीमित रखा जाए। लेकिन चिराग पासवान के कड़े रुख के कारण यह फार्मूला फिलहाल अटक गया है।


सूत्रों के अनुसार, आज दिल्ली में चिराग पासवान और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच बैठक होने वाली है। इस बैठक में सीटों के अंतिम फॉर्मूले पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि यदि आज की बैठक में सहमति बन जाती है, तो 10 अक्टूबर तक एनडीए में सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। इसके बाद 15 अक्टूबर तक पहले चरण के उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए में सीट बंटवारे का मसला जितना जल्दी सुलझे, उतना ही बेहतर रहेगा। यदि देरी होती है, तो इससे विपक्षी गठबंधन को प्रचार में बढ़त मिल सकती है। खासकर चिराग पासवान की नाराजगी अगर लंबी चली, तो यह भाजपा-जेडीयू गठबंधन के लिए सिरदर्द बन सकता है।


बहरहाल,  बिहार एनडीए के भीतर सीटों का बंटवारा एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। भाजपा और जेडीयू अपने पारंपरिक समीकरण को बनाए रखना चाहती हैं, जबकि चिराग पासवान अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की रणनीति में हैं। अब सबकी नजरें दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां से तय होगा कि आखिर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए का "सीट फार्मूला" क्या होगा।