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Bihar Election 2025: मतदान से पहले डिस्पैच सेंटर से बूथ तक EVM की कैसे होती है निगरानी? जानें पूरी डिटेल

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग के दौरान लाखों मतदाता EVM के जरिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार को मतदान कर रहे हैं। इन मशीनों की सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष और कड़े नियम बनाए हैं।

Bihar Election 2025
बिहार चुनाव 2025
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

Bihar Election 2025:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग के दौरान लाखों मतदाता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार को मतदान कर रहे हैं। इन मशीनों की सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग (ECI) ने विशेष और कड़े नियम बनाए हैं। चुनाव आयोग दो-स्तरीय सुरक्षा प्रक्रिया अपनाता है, पहली सुरक्षा चुनाव से पहले (Pre-Election Security) और दूसरी सुरक्षा मतदान के बाद (Post-Election Security)।


मतदान से पहले की सुरक्षा

मतदान से पहले हर EVM की गहन तकनीकी जांच की जाती है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) जैसी सरकारी कंपनियां मशीनों का निर्माण करती हैं। चुनाव से पहले इन मशीनों की जांच राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या त्रुटि न रह जाए। यदि कोई मशीन खराब पाई जाती है, तो उसे तुरंत फैक्ट्री भेज दिया जाता है।


इसके बाद मशीनों को एक सुरक्षित कमरे में रखा जाता है, जहां मोबाइल, कैमरा और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रवेश निषिद्ध होता है। कमरे की सुरक्षा राज्य पुलिस करती है। बिहार के सभी मतदान केंद्रों के लिए मशीनों पर मॉक पोल भी कराया जाता है, ताकि सभी उम्मीदवार यह सुनिश्चित कर सकें कि मशीनें पूरी तरह कार्यशील हैं।


मशीनों का रैंडमाइजेशन और वितरण

चुनाव आयोग मशीनों का वितरण दो बार रैंडम तरीके से करता है—पहले विधानसभा स्तर पर और फिर मतदान केंद्र स्तर पर। यह प्रक्रिया किसी भी साजिश या छेड़छाड़ की संभावना को लगभग समाप्त कर देती है। मतदान के दिन, मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल आयोजित किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि मशीनें पूरी तरह सही हैं और किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं है।


मतदान के बाद की सुरक्षा

जब मतदान समाप्त हो जाता है, तो हर EVM को सील किया जाता है। सील पर उम्मीदवारों के एजेंटों के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद मशीनों की सुरक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सौंप दी जाती है और उन्हें स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। स्ट्रांग रूम में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, बिजली की लगातार आपूर्ति और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की निरीक्षण सुविधा सुनिश्चित की जाती है। मतगणना से पहले सभी मशीनों और सीलों की पहचान संख्या की जांच की जाती है, ताकि कोई भी गड़बड़ी की संभावना न रहे।


EVM क्यों है पूरी तरह भरोसेमंद

EVM मशीनें किसी नेटवर्क या इंटरनेट से नहीं जुड़ी होती, इसलिए इन्हें हैक करना या रिमोट तरीके से बदलना असंभव है। हर मशीन की यूनिक आईडी और तीन-स्तरीय सीलिंग सिस्टम इसे और अधिक सुरक्षित बनाता है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी चुनाव आयोग ने इन मशीनों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है, ताकि मतदाता और राजनीतिक दल दोनों ही पूरी तरह विश्वास के साथ मतदान कर सकें।


चुनाव आयोग की यह पारदर्शी और कड़े नियमों वाली प्रक्रिया ईवीएम को विश्वसनीय वोटिंग प्रणाली बनाती है, जो न सिर्फ बिहार में बल्कि पूरे भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मज़बूती देती है। इस व्यवस्था से न केवल मतदाता का भरोसा बढ़ता है, बल्कि चुनाव परिणामों की सटीकता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होती है।

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