RANCHI: रांची में अपराधियों ने शूटरों की भर्ती का नया तरीका अपना लिया है। अब सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गैंग से जोड़ा जा रहा है। इतना ही नहीं, हर वारदात के लिए रकम भी तय है और पैसों का लेन-देन ऑनलाइन हो रहा है। रांची पुलिस की जांच में 3 हजार से 50 हजार रुपये तक की डील का खुलासा हुआ है। फर्जी मोबाइल नंबर, ऑनलाइन पेमेंट और हथियार सप्लाई के इस नेटवर्क ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। सवाल है कि आखिर सोशल मीडिया पर चल रहे इस आपराधिक नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं?
रांची में संगठित आपराधिक गिरोहों ने युवाओं की भर्ती का तरीका बदल दिया है। अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नए शूटरों को गैंग से जोड़ा जा रहा है। रांची पुलिस की जांच में इस नए नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि अपराधियों के बीच ऑनलाइन संपर्क, पैसों का लेन-देन और हथियारों की सप्लाई के लिए अलग-अलग लोग काम कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, युवाओं को गिरोह में शामिल करने के लिए पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया जाता है। बातचीत के बाद उन्हें गोलीबारी समेत दूसरी आपराधिक वारदातों में शामिल किया जाता है। अपराध की प्रकृति और भूमिका के हिसाब से शूटरों को रकम दी जाती है। इस नेटवर्क में 3 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के भुगतान की बात सामने आई है।
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि पुलिस की जांच में अपराधियों के सोशल मीडिया नेटवर्क पर सक्रिय रहने और युवाओं की भर्ती कराने की जानकारी मिली है। गिरोह से जुड़ने वाले युवाओं के जरिए गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम दिलाया जा रहा है। पुलिस ऐसे युवाओं और उनके संपर्क में रहने वाले अपराधियों की पहचान करने में जुटी है। उन्होंने युवाओं से अपराधियों के बहकावे में नहीं आने की अपील की है।
हथियार सप्लाई के लिए अलग नेटवर्क
पुलिस की जांच में हथियार सप्लायरों की भूमिका भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि शूटरों को हथियार उपलब्ध कराने के लिए सप्लायर से संपर्क किया जाता है। हथियार की व्यवस्था के बदले उसे पैसे दिए जाते हैं। इस तरह गिरोह में शूटरों की भर्ती और हथियारों की सप्लाई के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका तय है।
फर्जी नंबरों से छिपाते हैं पहचान
पुलिस के मुताबिक, अपराधी सोशल मीडिया पर अपनी असली पहचान उजागर नहीं करते। इसके लिए फर्जी मोबाइल नंबरों और दूसरी पहचान का इस्तेमाल किया जाता है। इसी के जरिए संभावित शूटरों से बातचीत और संपर्क स्थापित किया जाता है, ताकि उनकी गतिविधियों का पता लगाना पुलिस के लिए मुश्किल हो।
झारखंड के दूसरे जिलों तक नेटवर्क की जांच
रांची पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे सक्रिय लोगों, शूटरों और हथियार सप्लायरों की पहचान कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क का विस्तार झारखंड के किन-किन जिलों तक है और इसमें कितने लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।





