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गोपालगंज में डॉक्टर का WhatsApp हैक, साइबर ठगों ने परिचितों से मदद के नाम पर ठगे 40 हजार रुपये

GOPALGANJ: बिहार के गोपालगंज में साइबर अपराधियों ने सदर अस्पताल के एक डॉक्टर को निशाना बनाते हुए उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया। इसके बाद ठगों ने डॉक्टर के परिचितों से इमरज

बिहार न्यूज
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

GOPALGANJ: बिहार के गोपालगंज में साइबर अपराधियों ने सदर अस्पताल के एक डॉक्टर को निशाना बनाते हुए उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया। इसके बाद ठगों ने डॉक्टर के परिचितों से इमरजेंसी के नाम पर पैसे मांगे, जिसमें कई लोगों ने यूपीआई के जरिए करीब 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। मामले में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।


गोपालगंज में साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी सक्रियता का परिचय देते हुए इस बार सदर अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर को निशाना बनाया है। साइबर अपराधियों ने डॉक्टर का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर उनके परिचितों से इमरजेंसी सहायता के नाम पर रुपये मांग लिए। कई लोगों ने भरोसा कर यूपीआई के माध्यम से करीब 40 हजार रुपये भी भेज दिए। पीड़ित की पहचान गोपालगंज सदर अस्पताल में तैनात डॉ. संतोष कुमार के रूप में हुई है। उन्होंने साइबर थाने में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


ब्लू डार्ट एजेंट बनकर किया कॉल

डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि शाम के समय उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ब्लू डार्ट एक्सप्रेस का एजेंट बताया और कहा कि उनके नाम बैंक से संबंधित एक पार्सल आया है। उसने डिलीवरी के लिए एक अन्य मोबाइल नंबर पर संपर्क करने को कहा। डॉक्टर ने बताए गए नंबर पर कॉल किया। इसके कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप से संबंधित एक संदेश आया और देखते ही देखते उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक हो गया।


15 से 20 मिनट तक प्रभावित रही कॉल सुविधा

डॉक्टर के अनुसार, व्हाट्सएप हैक होने के बाद करीब 15 से 20 मिनट तक उनके मोबाइल की कॉल सुविधा भी प्रभावित रही। इस दौरान फोन पर कॉल तो आ रहे थे, लेकिन वे उन्हें दिखाई नहीं दे रहे थे। इसी बीच साइबर अपराधियों ने उनके व्हाट्सएप अकाउंट से जुड़े सभी परिचितों को इमरजेंसी और आर्थिक मदद के नाम पर पैसे भेजने के संदेश भेजने शुरू कर दिए।


परिचितों ने भेज दिए 40 हजार रुपये

डॉक्टर के कई परिचितों ने उन्हें परेशानी में समझकर यूपीआई के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कर दिए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने इस तरीके से करीब 40 हजार रुपये की ठगी कर ली। बाद में ठगों ने एक बार फिर खुद को ब्लू डार्ट एजेंट बताकर और रुपये मांगने की कोशिश की। इस दौरान कुछ परिचितों को संदेह हुआ और उन्होंने सीधे डॉक्टर से संपर्क करने का प्रयास किया, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।


साइबर थाने में एफआईआर दर्ज

घटना की जानकारी मिलते ही डॉ. संतोष कुमार ने साइबर थाने पहुंचकर लिखित आवेदन दिया और प्राथमिकी दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किस यूपीआई खाते में भेजी गई और इस गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल हैं।


पुलिस की अपील

साइबर थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी परिचित के नाम से पैसे मांगने का संदेश मिले तो पहले फोन कर उसकी पुष्टि अवश्य करें। साथ ही किसी भी अनजान कॉल, लिंक, क्यूआर कोड या ओटीपी के झांसे में न आएं।यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब आम लोगों के साथ-साथ डॉक्टरों, अधिकारियों और अन्य पेशेवरों को भी निशाना बना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता और जागरूकता ही इस तरह की साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।