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Bihar News: विधायकों के बंगला-फ्लैट मरम्मति के नाम पर Estimate का काला खेल, अधीक्षण अभियंता पकड़े गए...मिला यह दंड

पटना में विधायकों और अफसरों के फ्लैट में काम के नाम पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता उमेश कुमार मंडल को बिना जांच प्राक्कलन स्वीकृति के लिए भेजने और नियमों की अनदेखी करने का दोषी पाया गया।

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Viveka Nand
3 मिनट

Bihar News: राजधानी पटना में विधायकों-अफसरों के फ्लैट में काम कराने के नाम पर बड़ा खेल किया जाता है. इस खेल में भवन निर्माण विभाग के इंजीनियर शामिल होते हैं. प्राक्कलन में गड़बड़ी की जाती है. एक ऐसे ही आरोप में अधीक्षण अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की गई है. 

उमेश कुमार मंडल, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, दक्षिण बिहार अंचल, अब सेवानिवृत्त हो गए हैं. इनके खिलाफ आवास संख्या-B3/40, 96 ऑफिसर्स फ्लैट, बेली रोड, पटना में कार्यपालक अभियंता, पाटलिपुत्र भवन प्रमंडल, पटना द्वारा भेजे गए प्राक्कलन को बिना जाँच किये ही प्रशासनिक स्वीकृति के लिए मुख्य अभियंता (पटना) को भेज दिया. प्रशासनिक स्वीकृति के क्रम में पाया गया कि प्राक्कलन में Renovation शब्द लिखा हुआ है, जबकि दिये गये मदों से स्पष्ट है कि यह कार्य मूल प्रकृति का है। साथ ही उस प्राक्कलन में एक ही कार्य को कई पार्ट में तोड़ा गया था. जिससे स्पष्ट है कि वरीय अधिकारियों को दिग्भ्रमित करते हुए कार्य में लापरवाही एवं शिथिलता बरती गई।  

इस आरोप के लिए मंडल से स्पष्टीकरण की माँग की गयी. स्पष्टीकरण पर तकनीकी समिति का मंतव्य लिया गया. मंतव्य में कहा गया कि, सदस्य, बिहार विधान सभा द्वारा पूर्व से निर्मित Visitors एवं Staff Quarter के जर्जर स्थिति रहने के कारण Renovation के लिए अनुरोध किया गया था. इस आलोक में प्राक्कलन गठित किया गया। प्राक्कलन के मदों से स्पष्ट है कि Visitor Shed का पुनर्निर्माण किया गया है, जो मूल प्रकृति का कार्य है। ऐसे में निर्माण से पूर्व मुख वास्तुविद् से इस कार्य का नक्शा अनुमोदित कराकर कार्य सम्पन्न किया जाना था, जो नहीं किया गया। इस प्रकार लोक निर्माण लेखा संहिता में उल्लेखित नियम का पालन नहीं किया गया है। कार्य एक ही परिसर में होना था . ऐसे में प्राक्कलन पर तकनीकी अनुमोदन प्राप्त कर प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करना चाहिए था. 

इस संबंध में विभाग द्वारा कई बार पत्र के माध्यम से सभी कार्यपालक अभियंता / अधीक्षण अभियंता को निदेशित किया जा चुका है। ऐसे में एक ही परिसर में कराये जाने वाले विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग प्राक्कलन गठित कर विभागीय आदेश की अवहेलना की गयी है. तत्कालीन अधीक्षण अभियंता उमेश कुमार मंडल को मूल प्रकृति के कार्यों को Renovation बताते हुए बगैर विधिवत जाँच किये ही प्राक्कलन को स्वीकृति हेतु अग्रसारित करने का दोषी पाया गया। 

ऐसे में प्रमाणित आरोपों के लिए उमेश कुमार मंडल, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, दक्षिण बिहार अंचल ,सम्प्रति सेवानिवृत्त के खिलाफ बिहार पेंशन नियमावली के तहत 'पेंशन से एक वर्ष के लिए पाँच प्रतिशत राशि की कटौती का दंड पारित किया गया है. भवन निर्माण विभाग के संयुक्त ने 29 अप्रैल को यह पत्र जारी किया है. 

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता