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Success Story: विदेश में पढ़े इस युवक ने छोले-कुलचे को बनाया ब्रांड, अब कमा रहे हैं करोडों रुपए; जानिए...अनोखी स्टार्टअप की जर्नी

Success Story: पहले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर छोले-कुलचे बेच रहा है यह युवक करोडों की कमाई कर रहा है. जानें.. क्या है 'चख दे छोले' की सफलता की कहानी?

Success Story
सफलता की कहानी
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Viveka Nand
5 मिनट

Success Story: दिल्ली के सागर मल्होत्रा ने एक अद्भुत पहल की शुरुआत की है। उन्होंने भारत की पहली छोले-कुलचे की वेंडिंग मशीन बनाई है, जो सिर्फ 60 सेकेंड में ताजे और स्वादिष्ट छोले-कुलचे तैयार करती है। यह पहल सागर मल्होत्रा के लिए एक नए मुकाम की शुरुआत है, जिसने पहले बैंकर के तौर पर करियर को छोड़कर अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। सागर की "चख दे छोले" वेंडिंग मशीन ने न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से एक क्रांति ला दी है, बल्कि भारतीय खाद्य संस्कृति को भी नई दिशा दी है।


सागर मल्होत्रा दिल्ली के जनकपुरी इलाके में पले-बढ़े हैं और उन्हें हमेशा से खाने का शौक था। खासकर, उत्तर भारत का मशहूर व्यंजन छोले-कुलचे उन्हें बेहद पसंद था। लेकिन जब वह बेंगलुरु, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में रहे, तो उन्हें इस स्वाद का सही अनुभव नहीं मिल पाया। यही कारण था कि वह हमेशा सोचते थे कि उत्तर भारत का यह लोकप्रिय व्यंजन बाकी जगहों पर क्यों नहीं मिलता।


सागर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से सीनियर मैनेजमेंट प्रोग्राम किया और वहां विभिन्न सीईओ और उद्यमियों से मिले, जिन्होंने उन्हें अपनी नौकरी के साथ-साथ कुछ नया करने की प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने क्रेडिट सुइस जैसी प्रमुख बैंकिंग कंपनी में 10 साल तक काम किया, लेकिन 2024 में उन्होंने अपने बैंकर के करियर को छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करने का निर्णय लिया।


सागर मल्होत्रा ने अपनी कंपनी "चख दे छोले" की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति को स्वच्छ, ताजे और स्वादिष्ट छोले-कुलचे उपलब्ध कराना था। सागर के अनुसार, सड़क किनारे मिलने वाले छोले-कुलचे में स्वाद और सफाई की कमी होती थी, और वह चाहते थे कि इस पारंपरिक व्यंजन को एक नई और स्वच्छ तकनीकी प्रक्रिया से लोगों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए उन्होंने एक वेंडिंग मशीन बनाई, जो 60 सेकेंड में छोले-कुलचे तैयार कर देती है।


यह मशीन तीन बड़ी समस्याओं जैसे, स्वच्छता - मशीन के अंदर स्वच्छता बनाए रखना आसान है। को हल करती है। समय - यह मिनटों में छोले-कुलचे परोस देती है और स्वाद - मशीन हर बार एक जैसा स्वाद प्रदान करती है, जो हाथ से बनाने की प्रक्रिया से अलग है। सागर ने पहले मॉडल में कुछ कमियां पाई थीं, जैसे कि मशीन 30-40 प्लेट परोसने के बाद खराब हो जाती थी। लेकिन उन्होंने निरंतर सुधार किया और नवंबर 2024 में एक नई मशीन बनाई, जो सैकड़ों प्लेट परोसने में सक्षम थी और उसे बार-बार ठीक करने की जरूरत नहीं थी। 


इस सुधार के बाद "चख दे छोले" की सफलता की शुरुआत हुई। अब, यह एक बड़ा फूड वेंडिंग वेंचर बन चुका है, जो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। सागर के बिजनेस ने अभी तक 10 लाख रुपये की आय अर्जित की है और उनका लक्ष्य और भी आउटलेट्स खोलना है। वह जयपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी अपनी सेवाएं विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।


सागर मल्होत्रा का अगला लक्ष्य है कि उनकी वेंडिंग मशीन में कुलचे सेंकने की प्रक्रिया भी ऑटोमेटिक हो जाए, ताकि यह पूरी प्रक्रिया स्वचालित हो सके। वह चाहते हैं कि छोले और कुलचे दोनों ही उनके वेंडिंग मशीन से सीधे तैयार होकर ग्राहकों को मिलें। इससे ग्राहकों के लिए यह अनुभव और भी सरल और सुविधाजनक हो जाएगा।


सागर मल्होत्रा की मेहनत और नवीनतम तकनीक का संयोजन उनके व्यापार को एक नई दिशा देने में सफल साबित हो रहा है। वह अपने वेंचर "चख दे छोले" को देशभर में पहचान दिलाना चाहते हैं और खाने के प्रेमियों को एक नया अनुभव प्रदान करना चाहते हैं। सागर ने न सिर्फ "चख दे छोले" जैसे शानदार वेंडिंग मशीन के विचार को साकार किया है, बल्कि उन्होंने अपनी मेहनत, जुनून और अपने परिवार के समर्थन से भारतीय खाद्य उद्योग में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। उनके व्यवसाय ने यह सिद्ध कर दिया कि नवाचार और तकनीकी विकास के माध्यम से पुरानी परंपराओं को नया रूप दिया जा सकता है।

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