NEET UG Success Story: हर साल करीब 20 से 21 लाख विद्यार्थी नीट यूजी परीक्षा देते हैं। अधिकांश छात्रों का लक्ष्य एमबीबीएस सीट हासिल कर डॉक्टर बनना होता है, लेकिन देश में सीमित एमबीबीएस सीटों के कारण कई छात्रों को दूसरे मेडिकल कोर्स चुनने पड़ते हैं।
हालांकि, डॉ. उपासना वोहरा की कहानी इस सोच को बदल देती है कि केवल कम अंक पाने वाले छात्र ही आयुर्वेद की पढ़ाई करते हैं। उन्होंने अच्छे अंक और शानदार रैंक मिलने के बावजूद अपनी इच्छा से एमबीबीएस की सीट छोड़कर बीएएमएस (आयुर्वेद) को चुना और आज एक सफल आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
हिमाचल के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
डॉ. उपासना वोहरा हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के छोटे से गांव नहरिया की रहने वाली हैं। उनका बचपन सीमित संसाधनों और साधारण परिवेश में बीता। शुरुआती पढ़ाई एक निजी स्कूल में हुई, जहां अधिकतर बातचीत पहाड़ी भाषा में होती थी और अंग्रेजी का महत्व उन्हें बाद में समझ आया। उनके गांव से स्कूल की बस सुबह 5 बजे निकल जाती थी, जबकि स्कूल का समय 8 या 9 बजे का होता था। उनके माता-पिता रोज सुबह 4 बजे उठकर उन्हें तैयार करते थे। यही अनुशासन और मेहनत आगे चलकर उनकी सफलता की नींव बना।
PMT में शानदार सफलता, फिर भी छोड़ दी MBBS सीट
उपासना ने उस समय की प्री-मेडिकल टेस्ट (PMT) परीक्षा, जिसे आज नीट यूजी के नाम से जाना जाता है, में 800 में से 636 अंक हासिल किए। उनकी रैंक इतनी अच्छी थी कि उन्हें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में एमबीबीएस सीट मिल रही थी।
इसके बावजूद उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला नहीं लिया। उनका मानना था कि उनकी रुचि आयुर्वेद में है और वह उसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने यह भी सोचा कि यदि वह एमबीबीएस सीट छोड़ देंगी तो किसी अन्य जरूरतमंद छात्र को अवसर मिल सकेगा। उनके इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन उन्होंने अपने निर्णय पर अडिग रहीं।
पंजाब PMT में हासिल किया पहला स्थान
जोश टॉक्स में डॉ. उपासना ने बताया कि कुछ कारणों से वह हिमाचल पीएमटी परीक्षा नहीं दे पाई थीं। इसके बाद उन्होंने पंजाब पीएमटी परीक्षा दी। उस समय अन्य राज्यों के छात्रों के लिए केवल पांच सीटें थीं, लेकिन उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया और गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, पटियाला में बीएएमएस की पढ़ाई शुरू की। उनका मानना है कि किसी डॉक्टर की सफलता उसके कॉलेज से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, लगन और सीखने की इच्छा से तय होती है।
चरक संहिता पढ़ने के लिए दो दिन तक नहीं खाया भोजन
कॉलेज के दौरान किसी ने उनसे संस्कृत में लिखी चरक संहिता को लेकर सवाल पूछा। आयुर्वेद की प्रमाणिकता को समझने और सही उत्तर देने के लिए उन्होंने लगातार दो दिन तक बिना भोजन किए पूरी चरक संहिता का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने उस प्रश्न का सटीक उत्तर दिया। यह घटना आयुर्वेद के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है।
पहली कोशिश में UPSC प्रीलिम्स पास
डॉ. उपासना ने जिज्ञासा के कारण यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने पहली ही कोशिश में यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली और दो बार मेंस परीक्षा तक पहुंचीं। हालांकि, उनका अंतिम लक्ष्य प्रशासनिक सेवा नहीं, बल्कि आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करना था। आज वह दिल्ली में अपना वोहरा आयुर्वेदिक हॉस्पिटल और पंचकर्म सेंटर संचालित कर रही हैं। उन्होंने बांझपन (Infertility) के उपचार पर गहन शोध किया है और इस क्षेत्र में विशेष चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
NEET छात्रों के लिए दिया खास संदेश
डॉ. उपासना का कहना है कि डॉक्टर बनने का एकमात्र रास्ता एमबीबीएस नहीं है। मेडिकल क्षेत्र में बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीएनवाईएस और अन्य कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। उनके अनुसार, यदि किसी छात्र में लगन, मेहनत और अपने विषय के प्रति समर्पण है, तो वह किसी भी मेडिकल क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलता हासिल कर सकता है।





