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बिहार की बेटी का कमाल: 21 की उम्र में बिना कोचिंग पहले ही प्रयास में बनीं IAS, जानिए क्या है श्रेया श्री की सफलता का राज

Success Story: बिहार की श्रेया श्री ने कम उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर अपनी अलग पहचान बनाई। IIT कानपुर से पढ़ाई के बाद उन्होंने बिना कोचिंग सेल्फ-स्टडी के जरिए पहले ही प्रयास में UPSC में 71वीं रैंक हासिल की। उनकी पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक सेवा...

बिहार की बेटी का कमाल: 21 की उम्र में बिना कोचिंग पहले ही प्रयास में बनीं IAS, जानिए क्या है श्रेया श्री की सफलता का राज
Ramakant kumar
5 मिनट

IAS Shreya Shri Success Story: बिहार की बेटी श्रेया श्री ने कम उम्र में वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना देश के लाखों युवा देखते हैं. महज 21 साल की उम्र में उन्होंने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास की और ऑल इंडिया 71वीं रैंक हासिल की. खास बात यह रही कि उन्होंने इसके लिए किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि सेल्फ स्टडी के दम पर अपनी तैयारी पूरी की.


श्रेया की कहानी सिर्फ UPSC में सफलता की नहीं है, बल्कि सही दिशा में मेहनत और खुद पर भरोसा रखने की कहानी भी है. बिहार के वैशाली जिले के लालगंज प्रखंड के एतवारपुर सिसई गांव से निकलकर उन्होंने IIT कानपुर से पढ़ाई की और इसके बाद देश की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई.


बिहार के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर

श्रेया श्री मूल रूप से वैशाली जिले की रहने वाली हैं. उनके पिता मिथिलेश कुमार खुद प्रशासनिक सेवा में हैं. घर में पढ़ाई और प्रशासनिक सेवा का माहौल होने की वजह से श्रेया को शुरू से ही पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहन मिला.


श्रेया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई का रास्ता चुना. उनका चयन IIT कानपुर में हुआ. देश के प्रतिष्ठित संस्थान से उन्होंने ग्रेजुएशन और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.


IIT में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अपने करियर को लेकर एक बड़ा फैसला किया. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उनका लक्ष्य सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं था. वह सिविल सर्विस में जाना चाहती थीं और प्रशासनिक सेवा के जरिए लोगों के बीच काम करना चाहती थीं.


बिना किसी कोचिंग, सेल्फ स्टडी से हासिल किया मुकाम

UPSC की तैयारी को लेकर अक्सर छात्रों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बिना महंगी कोचिंग के इस परीक्षा को पास किया जा सकता है. श्रेया श्री ने अपने तरीके से इसका जवाब दिया.


उन्होंने UPSC की तैयारी के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया. उन्होंने खुद सिलेबस को समझा, पढ़ाई के लिए समय तय किया और अपनी तैयारी को उसी हिसाब से आगे बढ़ाया.


सेल्फ स्टडी में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि पढ़ाई की दिशा खुद तय करनी पड़ती है. कौन सी किताब पढ़नी है, कितना पढ़ना है, किस विषय पर ज्यादा समय देना है और अपनी तैयारी में कमी कहां रह रही है, इन सभी चीजों पर खुद नजर रखनी होती है. श्रेया ने इसी तरीके से अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया.


उन्होंने अपनी पढ़ाई को लगातार जारी रखा और लक्ष्य से ध्यान भटकने नहीं दिया. IIT की पढ़ाई और UPSC की तैयारी को साथ लेकर चलना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने दोनों के बीच संतुलन बनाया.


पहले ही प्रयास में मिली 71वीं रैंक

मेहनत का नतीजा UPSC 2021 के रिजल्ट में सामने आया. श्रेया श्री ने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 71वीं रैंक हासिल की.


जिस उम्र में ज्यादातर युवा अपने करियर की दिशा तय करने में लगे होते हैं, उस उम्र में श्रेया ने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल UPSC को पास कर लिया. उनकी सफलता ने यह भी दिखाया कि तैयारी के लिए सिर्फ संसाधन ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि पढ़ाई को लेकर स्पष्ट लक्ष्य और लगातार मेहनत भी अहम भूमिका निभाती है.


IAS बनकर बिहार में ही संभाली जिम्मेदारी

UPSC में सफलता के बाद श्रेया ने प्रशासनिक सेवा की ट्रेनिंग पूरी की. इसके बाद उन्हें अपने गृह राज्य बिहार में काम करने का मौका मिला. उन्होंने मुजफ्फरपुर में एसडीओ के तौर पर प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद वह खगड़िया में उप विकास आयुक्त के पद पर भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं. प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर उनका काम सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने और आम लोगों से जुड़े मामलों को देखने से जुड़ा रहा है.


गांव से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का उनका सफर बिहार के उन युवाओं के लिए खास है, जो सीमित संसाधनों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.