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कभी तोड़ते थे पत्थर, आज हैं अधिकारी: मजदूरी करने वाला बेटा बना डीएसपी, जानिए कौन हैं ये खास शख्स

Success Story: एक छोटे से गांव से निकलकर डीएसपी बनने तक संतोष पटेल का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। गरीबी और कठिन हालात के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल किया, जो आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 02, 2026, 4:33:56 PM

कभी तोड़ते थे पत्थर, आज हैं अधिकारी: मजदूरी करने वाला बेटा बना डीएसपी, जानिए कौन हैं ये खास शख्स

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MPPSC Success Story: "कोशिश कर, रास्ता निकलेगा; आज नहीं तो कल निकलेगा। अर्जुन के तीर सा लक्ष्य साध, मरुस्थल से भी जल निकलेगा..." कवि आनंद परम की ये पंक्तियां उस जज्बे को बयां करती हैं, जिसने मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर ग्वालियर में डीएसपी बनने तक संतोष पटेल के सफर को मुकाम तक पहुंचाया। यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, कड़ी मेहनत और अटूट हौसले की प्रेरक दास्तान है, जो बताती है कि हालात चाहे कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इरादों के आगे हर मुश्किल हार मान ही लेती है।


गरीबी में बीता बचपन, संघर्ष बना जिंदगी का हिस्सा

संतोष पटेल का जन्म एक बेहद साधारण परिवार में हुआ। उनके गांव देवगांव (अजयगढ़ तहसील) में जीवन की बुनियादी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। बचपन से ही उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा। खेलने-कूदने की उम्र में ही उन्हें परिवार का सहारा बनना पड़ा।

पेट पालने के लिए वह अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करते थे। कभी पत्थर तोड़ते, तो कभी जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता इकट्ठा करते और उसे बेचकर घर का खर्च चलाते। बरसात के मौसम में पौधे लगाने का काम भी किया। जिंदगी आसान नहीं थी, लेकिन संतोष ने कभी हार नहीं मानी।


पढ़ाई बनी जिंदगी बदलने का रास्ता

संतोष को जल्द ही यह समझ आ गया था कि अगर जिंदगी बदलनी है, तो पढ़ाई ही एकमात्र रास्ता है। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से समझौता नहीं किया।

जब उन्हें बेहतर स्कूल में पढ़ने का मौका मिला, तो उन्होंने उसे पूरी मेहनत से भुनाया। 10वीं कक्षा में उन्होंने 92 प्रतिशत अंक हासिल किए, जो उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का पल था।


असफलता से नहीं टूटा हौसला

12वीं के बाद संतोष ने IIT में दाखिले की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यह उनके जीवन का कठिन समय था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

इसके बाद उन्होंने भोपाल के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने छोटे-मोटे काम भी किए, ताकि परिवार पर बोझ कम हो सके।


लक्ष्य तय किया और पूरी ताकत झोंक दी

इंजीनियरिंग के बाद संतोष ने तय किया कि अब उन्हें सिविल सेवा में जाना है। उन्होंने खुद से वादा किया कि जब तक बड़ी सरकारी नौकरी हासिल नहीं करेंगे, तब तक पीछे नहीं हटेंगे। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और लगातार चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।


दो प्रयासों में हासिल की बड़ी सफलता

संतोष ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा दी। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दूसरे प्रयास में उन्होंने परीक्षा पास कर ली और डीएसपी बन गए। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था, जहां उनकी सालों की मेहनत रंग लाई।


आज बन चुके हैं युवाओं के लिए प्रेरणा

आज संतोष पटेल ग्वालियर में एसडीओपी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।


संतोष मानते हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, धैर्य और खुद पर विश्वास ही आपको आगे बढ़ाता है।