1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 22 Feb 2026 06:39:43 PM IST
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CBSE Board Exam 2026: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 के दौरान 10वीं और 12वीं के प्रश्नपत्रों को लेकर नया विवाद सामने आया है। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि कुछ विषयों के प्रश्नपत्रों का स्तर सामान्य बोर्ड परीक्षा से अधिक कठिन था। कहा जा रहा है कि कई प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर आईआईटी-जेईई, के स्तर के थे। इसी मुद्दे को लेकर बोर्ड के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है।
43 लाख से अधिक छात्र दे रहे परीक्षा
इस वर्ष देश और विदेश के विभिन्न केंद्रों पर करीब 43 लाख छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हुईं। पहले ही दिन 10वीं गणित के प्रश्नपत्र को लेकर आपत्तियां सामने आईं। इसके बाद 12वीं भौतिकी सहित अन्य विषयों के पेपर को लेकर भी कठिनाई स्तर पर चर्चा तेज हो गई।
अलग-अलग सेट में कठिनाई का अंतर
छात्रों का कहना है कि अलग-अलग सेट में प्रश्नों का स्तर समान नहीं था। कुछ सेट अपेक्षाकृत आसान बताए जा रहे हैं, जबकि अन्य सेट में जटिल और गहन समझ की मांग करने वाले प्रश्न शामिल थे। इससे निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सीबीएसई के खिलाफ जनहित याचिका
शिक्षक प्रशांत किराड ने इस मामले में सीबीएसई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय कठिनाई स्तर में संतुलन नहीं रखा गया। उनका तर्क है कि बोर्ड परीक्षा का उद्देश्य सभी छात्रों को समान अवसर देना होता है, इसलिए प्रश्नपत्रों में एकरूपता आवश्यक है।
नॉर्मलाइजेशन लागू करने की मांग
याचिका में यह मांग की गई है कि जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में अलग-अलग शिफ्ट के कारण नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, वैसे ही बोर्ड परीक्षाओं में भी कठिनाई स्तर को संतुलित करने के लिए ऐसी व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रश्न निर्धारित एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की सीमा से बाहर थे।
प्रश्नपत्र के पृष्ठों में अंतर पर भी सवाल
10वीं गणित बेसिक के दो अलग-अलग सेटों में पृष्ठों की संख्या में बड़ा अंतर देखने को मिला। दोनों में प्रश्नों की संख्या और समय समान था, लेकिन एक सेट 15 पृष्ठों का था, जबकि दूसरे में 27 पृष्ठ थे। इस अंतर को लेकर भी छात्र और अभिभावक चिंता जता रहे हैं।
ग्रेस मार्क्स और मूल्यांकन में राहत की मांग
याचिकाकर्ता ने बोर्ड से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है। साथ ही जिन छात्रों को अधिक कठिन सेट मिला है, उन्हें ग्रेस मार्क्स देने या मूल्यांकन में राहत प्रदान करने की अपील की गई है। फिलहाल बोर्ड की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।