1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 25, 2026, 2:11:24 PM
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा व्यवस्था को और आधुनिक तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत अब स्कूलों में कार्यरत काउंसलर और वेलनेस टीचर्स को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित परीक्षा देनी होगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से संभालने के लिए काउंसलरों की क्षमता को परखना और उन्हें और अधिक सक्षम बनाना है।
CBSE द्वारा शुरू किया गया यह ऑनलाइन मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसे काउंसलर घर बैठे भी दे सकते हैं। यह पहल बोर्ड के “क्षमता विकास कार्यक्रम” का हिस्सा है, जिसके माध्यम से यह जांचा जाएगा कि काउंसलर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में छात्रों की समस्याओं को कितनी अच्छी तरह समझते और उनका समाधान करते हैं।
इस प्रक्रिया के तहत करीब 10,000 काउंसलरों को शामिल किया जाएगा। इसे अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जा रहा है, ताकि सभी प्रतिभागियों का व्यवस्थित तरीके से आकलन किया जा सके। इस परीक्षा का पहला बैच फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है और आगे भी चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी परीक्षा
यह परीक्षा DIGI-EXAM नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित की जा रही है। इसमें AI आधारित प्रोक्टरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जो परीक्षा के दौरान उम्मीदवार की गतिविधियों पर नजर रखता है। इससे परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। काउंसलर किसी भी स्थान से लॉगिन करके यह परीक्षा दे सकते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त सुविधा मिलती है।
क्या-क्या परखा जाएगा?
यह परीक्षा पारंपरिक लिखित परीक्षा से अलग है। इसमें केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि व्यवहारिक कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जाता है:
1. छात्रों को सही तरीके से काउंसलिंग देने की क्षमता
2. नैतिक और सही निर्णय लेने की समझ
3. छात्रों की मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को पहचानने और संभालने की योग्यता
4. स्कूल के वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि काउंसलर सिर्फ पढ़ाई के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कौन दे सकता है यह परीक्षा?
CBSE की यह AI आधारित परीक्षा कुछ विशेष वर्ग के लोगों के लिए निर्धारित की गई है। इसमें शामिल हैं:
1. स्कूल काउंसलर और वेलनेस टीचर्स
2. सामाजिक और भावनात्मक काउंसलिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स
3. CBSE से संबद्ध स्कूलों में कार्यरत कर्मचारी
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए काउंसलरों का चयन CBSE द्वारा किया जाता है या स्कूलों के माध्यम से उनका डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होता है कि काउंसलरों की जानकारी सही और अपडेटेड रहे, ताकि योग्य उम्मीदवारों को ही परीक्षा में शामिल किया जा सके।
AI प्रोक्टरिंग सिस्टम कैसे काम करता है?
इस परीक्षा की सबसे खास बात इसका AI आधारित निगरानी सिस्टम है, जो पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाता है। इसमें कई उन्नत फीचर्स शामिल हैं:
1. रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: परीक्षा के दौरान उम्मीदवार की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है
2. चीटिंग की पहचान: कोई भी संदिग्ध गतिविधि होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देता है
3. समान मूल्यांकन: सभी उम्मीदवारों का एक ही मानक के आधार पर आकलन किया जाता है
4. लचीलापन: काउंसलर कहीं से भी परीक्षा दे सकते हैं
इस पहल के माध्यम से CBSE न केवल काउंसलरों की गुणवत्ता में सुधार करना चाहता है, बल्कि स्कूलों में छात्रों के लिए एक बेहतर और मजबूत काउंसलिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है।