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रिटायर्ड शिक्षक का बेटा बना IFS अधिकारी: बहन अफसर, भाई IITian; UPSC में हासिल की 66वीं रैंक

UPSC Success Story: गया जिले के सरेबा गांव के निखिल कुमार ने UPSC भारतीय वन सेवा परीक्षा में 66वीं रैंक हासिल कर बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। IIT दिल्ली से बीटेक करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य चुना। यह सफलता उनके दूसरे प्रयास में मिली..

रिटायर्ड शिक्षक का बेटा बना IFS अधिकारी: बहन अफसर, भाई IITian; UPSC में हासिल की 66वीं रैंक
Ramakant kumar
3 मिनट

UPSC Success Story: बिहार के गया जिले के एक छोटे से गांव से निकली सफलता की कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। गुरारु प्रखंड के सरेबा गांव निवासी निखिल कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में देशभर में 66वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।


निखिल की सफलता की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि उन्होंने देश के प्रतिष्ठित IIT Delhi से बीटेक करने के बाद कॉरपोरेट दुनिया की बजाय प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। कठिन मेहनत, लगातार संघर्ष और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।


बताया जा रहा है कि निखिल को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली। पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया था। हालांकि उस असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बना दिया। उन्होंने अपनी तैयारी को नए तरीके से शुरू किया और इस बार शानदार रैंक हासिल कर ली।


निखिल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के डीएवी स्कूल से की। 12वीं के बाद उनका चयन IIT दिल्ली में हुआ, जहां से उन्होंने बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाना है। यही वजह रही कि इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी।


हालांकि भारतीय वन सेवा में चयन होने के बावजूद उनका सपना अभी अधूरा नहीं हुआ है। निखिल का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य IAS अधिकारी बनना है और इसके लिए उनकी तैयारी आगे भी जारी रहेगी।


निखिल के परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल हमेशा से रहा है। उनके पिता चंद्रभूषण सिंह गुरारु के सर्वोदय विद्या मंदिर प्लस टू विद्यालय से रिटायर्ड शिक्षक हैं। वहीं उनकी बड़ी बहन वर्तमान में जमुई जिले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। भाई भी IIT से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। ऐसे माहौल ने निखिल को बचपन से ही बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी।


उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। गांव के लोग इसे अपने क्षेत्र के लिए गर्व की बात बता रहे हैं। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अजय कुमार समेत कई शिक्षकों और ग्रामीणों ने निखिल को बधाई दी है।


ग्रामीणों का कहना है कि छोटे गांवों से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता, लेकिन निखिल ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।