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Online Food Delivery: क्या भूख लगते ही ऑर्डर करते हैं ऑनलाइन खाना? अब बढ़ेगा खर्च; जानें... पूरी डिटेल

Online Food Delivery: अगर आप भी ऑनलाइन खाना मंगवाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। 22 सितंबर 2025 से ऑनलाइन फूड डिलीवरी करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

Online Food Delivery
ऑनलाइन खाना मंगवाना
© GOOGLE
PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Online Food Delivery: अगर आप भी ऑनलाइन खाना मंगवाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। 22 सितंबर 2025 से ऑनलाइन फूड डिलीवरी करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। हाल ही में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए अहम फैसले के अनुसार, Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto जैसे फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को 18% जीएसटी स्लैब के दायरे में लाया गया है। पहले ये प्लेटफॉर्म रेस्तरां से टैक्स वसूलते थे, लेकिन अब उन्हें अपनी खुद की डिलीवरी सेवाओं पर भी 18% GST देना होगा।


अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि इस बढ़े हुए टैक्स बोझ को कंपनियां खुद वहन करेंगी या फिर ग्राहकों पर डाला जाएगा? इकोनॉमिक टाइम्स ने मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि इस फैसले से Zomato पर प्रति ऑर्डर लगभग 2 और Swiggy पर 2.6 का अतिरिक्त टैक्स भार पड़ेगा। वर्तमान में Zomato की एवरेज डिलीवरी फीस 11–12 और Swiggy की 14.5 के आसपास है। ऐसे में यदि कंपनियां यह टैक्स ग्राहकों से वसूलेंगी, तो डिलीवरी फीस में निश्चित रूप से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।


त्योहारी सीजन में अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से इन कंपनियों ने प्लेटफॉर्म फीस पहले ही बढ़ा दी थी। अब उस पर GST का नया भार इन कंपनियों के ऑपरेशनल खर्चों को और भी बढ़ा देगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक फूड डिलीवरी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, हमारे पास ग्राहकों पर यह बोझ डालने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में डिलीवरी ऑर्डर की कीमतें बढ़ सकती हैं।


नई टैक्स दरों के लागू होने के बाद ग्राहक Zomato या Swiggy के बजाय डोमिनोज़, KFC या अन्य ऑपरेटरों का रुख कर सकते हैं। डोमिनोज़ जैसे ब्रांड केवल 5% GST और पैकेजिंग चार्ज वसूलते हैं, जबकि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर अब 88 रुपये के ऑर्डर पर रेस्तरां GST, पैकिंग चार्ज, 15 रुपये प्लेटफॉर्म फीस और अब 18% डिलीवरी GST जुड़ जाएगा जिससे कुल राशि कहीं ज्यादा हो जाएगी।


यह बदलाव ग्राहकों के व्यवहार पर भी असर डालेगा और शायद लोग कम बार ऑर्डर करें या सीधे रेस्तरां से खरीदारी को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, फूड डिलीवरी कंपनियों को अपने प्राइसिंग मॉडल और सर्विस स्ट्रेटजी पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। 22 सितंबर से लागू हो रही यह नई GST नीति केवल कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम ग्राहकों के लिए भी एक नई चुनौती साबित हो सकती है। बढ़ते खर्च और टैक्स के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि फूड डिलीवरी इंडस्ट्री कैसे इस बदलाव को संभालती है।

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