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बिहार में नदियों से बढ़ेगा कारोबार, एनडब्ल्यू-1 पर बनेंगे 16 नए सामुदायिक जेटी; व्यापार को मिलेगी रफ्तार

Bihar Water Transport News: बिहार में गंगा और गंडक के जरिए जल परिवहन को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है। एनडब्ल्यू-1 पर 16 नए सामुदायिक जेटी का रास्ता साफ हो गया है, जबकि कई जगहों पर निर्माण भी शुरू हो चुका है। इससे किसानों, व्यापारियों...

बिहार में नदियों से बढ़ेगा कारोबार, एनडब्ल्यू-1 पर बनेंगे 16 नए सामुदायिक जेटी; व्यापार को मिलेगी रफ्तार
Ramakant kumar
5 मिनट

Bihar Water Transport News: गंगा और गंडक नदी के जरिए बिहार में जल परिवहन को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है. राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडब्ल्यू-1) पर 16 नए सामुदायिक जेटी के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. इनमें से 10 स्टील जेटी का निर्माण भी शुरू हो चुका है. वहीं, गंडक नदी के राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में दो नए जेटी बनाने का प्रस्ताव है.


राज्य में व्यापार, आवागमन और माल की ढुलाई को आसान बनाने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की ओर से राष्ट्रीय जलमार्गों पर सामुदायिक जेटी विकसित किए जा रहे हैं. इन जेटी के जरिए यात्रियों के साथ-साथ किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों को नदी के रास्ते सामान लाने-ले जाने की सुविधा मिलेगी.


8 जिलों में बनेंगे नए सामुदायिक जेटी

परिवहन विभाग के अनुसार, एनडब्ल्यू-1 पर 17 स्थानों को सामुदायिक जेटी के लिए चिन्हित किया गया है. इनमें से 16 स्थानों पर निर्माण के लिए संबंधित जिलों से IWAI को एनओसी मिल चुकी है. पटना, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर और आरा समेत कई जिलों में इन जेटी के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है.


पटना जिले में कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल और महाजी पीपापुल समेत अन्य स्थानों को चिन्हित किया गया है. वहीं, वैशाली में कोनहराघाट और हाजीपुर, सारण में हरिहरनाथ मंदिर और सोनपुर तथा समस्तीपुर में पत्थरघाट और धरनीपट्टी पश्चिम में जेटी निर्माण की योजना है.


बेगूसराय जिले में सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और चित्रोघाट को भी इस योजना में शामिल किया गया है. इसके अलावा वैशाली, भागलपुर और आरा में भी एनडब्ल्यू-1 पर सामुदायिक जेटी निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.


पटना के एनआईटी के पास प्रस्तावित जेटी के लिए अभी एनओसी नहीं मिली है. विभागीय स्तर पर इसके लिए प्रक्रिया जारी है.


10 स्टील जेटी का निर्माण शुरू

चिन्हित स्थानों में से 10 जगहों पर स्टील जेटी का निर्माण शुरू हो चुका है. इन जेटी के तैयार होने के बाद यात्रियों और सामान की आवाजाही के लिए नदी किनारे बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी.


गंडक नदी के राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में भी दो सामुदायिक जेटी बनाने का प्रस्ताव है. हालांकि, चिन्हित स्थानों पर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अभी इन दोनों जेटी के लिए एनओसी नहीं मिल सकी है.


11 जिलों में पहले से मौजूद हैं 21 जेटी

परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार के अनुसार, बिहार में एनडब्ल्यू-1 के किनारे 11 जिलों में पहले से 21 सामुदायिक जेटी मौजूद हैं. इनमें भोजपुर के खवासपुर और महुली घाट, पटना के दीघा, नकटा दियारा, पानापुर, नासरीगंज और बाढ़ शामिल हैं.


भागलपुर में तिनतंगा, सुल्तानगंज, कहलगांव और बटेश्वरनाथ में जेटी मौजूद हैं. इसके अलावा वैशाली और कटिहार में दो-दो तथा बक्सर, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया में एक-एक सामुदायिक जेटी है.


इनमें कुछ जेटी स्टील से बनाए गए हैं, जबकि कई जेटी एचडीपीई यानी प्लास्टिक सामग्री से निर्मित हैं.


सामुदायिक जेटी के विस्तार से नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ किसानों, मछुआरों और व्यापारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली उपज और दूसरे सामान को नदी के रास्ते कम लागत में दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जा सकेगा.


जल परिवहन के जरिए माल ढुलाई बढ़ने से सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव भी कम हो सकता है. इसके साथ ही नदी के रास्ते परिवहन को सड़क परिवहन की तुलना में पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है.


IWAI की ओर से सामुदायिक जेटी के निर्माण के साथ करीब दो साल तक इनके संचालन की व्यवस्था की जाती है. सफल संचालन के बाद इन जेटी को इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (IWT), बिहार को हस्तांतरित किया जाता है.


परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कहा कि सामुदायिक जेटी स्थानीय लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं. राज्य में इन सुविधाओं का विस्तार होने से बिहार में जल परिवहन के जरिए व्यापार और आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद है.