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यात्रीगण कृपया ध्यान दें: इतने तारीख से पाटलिपुत्र-गोरखपुर एक्सप्रेस का परिचालन ICF की जगह LHB कोच से

दुर्घटना के दौरान ICF कोच के डिब्बे एक दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं जबकि LHB कोच एक दूसरे पर नहीं चढ़ते क्योंकि इसमें सेंटर बफर कॉलिंग सिस्टम लगा होता है. जिससे LHB कोच में जान माल की कम हानि होती है।

BIHAR
ट्रेन का परिचालन
© GOOGLE
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

VAISHALI: पूर्व मध्य रेल द्वारा यात्रियों की यात्रा को और ज्यादा सुरक्षित एवं आरामदायक बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 22 मार्च, 2025 से पाटलिपुत्र और गोरखपुर के बीच चलने वाली गाड़ी सं. 15079/15080 पाटलिपुत्र-गोरखपुर-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का परिचालन आईसीएफ कोच के बदले अत्याधुनिक एलएचबी कोच से किया जाएगा । 


एलएचबी रेक में परिवर्तन के फलस्वरूप गाड़ी सं. 15079/15080 पाटलिपुत्र-गोरखपुर- पाटलिपुत्र एक्सप्रेस में कोचों की संख्या 12 से बढ़कर 19 हो जायेगी। संशोधित रेक संरचना के अनुसार 22 मार्च, 2025 से गाड़ी सं. 15079/15080 पाटलिपुत्र-गोरखपुर-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस में जनरेटर सह लगेज यान का 01, एल.एस.एल.आर.डी. का 01, साधारण द्वितीय श्रेणी के 07 तथा आरक्षित कुर्सीयान के 10 कोच सहित कुल 19 कोच होंगे।  


एलएचबी कोच यात्रियों को अपेक्षाकृत अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान कराता है । स्टेनलेस स्टील से निर्मित बेहतर आंतरिक सज्जा युक्त उच्च गति क्षमता वाले अत्याधुनिक एलएचबी कोच आईसीएफ कोच की तुलना में वजन में हल्के और मजबूत होते हैं। कोचों में आधुनिक सीबीसी कपलिंग लगे होने से संरक्षा में वृद्धि होती है ।  एंटी क्लाइम्बिंग विशेषताएं दुर्घटनाओं के दौरान उन्हें एक-दूसरे पर चढ़ने से रोकती हैं । कोच बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम व सस्पेंशन के साथ-साथ बेहतर आंतरिक सज्जा व शौचालय युक्त होते हैं। फलस्वरूप एलएचबी कोच युक्त ट्रेनों से यात्रा अपेक्षाकृत अधिक संरक्षित, सुरक्षित व आरामदायक होती है।


नीले रंग वाले कोच को ICF (Integral Coach Factory) कोच और लाल रंग वाले कोच को  LHB (Linke Hofmann Busch) कहा जाता है। हालांकि वर्तमान में हल्के नीले रंग में भी एलएचबी कोच (Linke Hofmann Busch) बनाए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल हफसफर एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस में किया जाता है. आईसीएफ कोच (ICF Coach) एक पारंपरिक रेलवे कोच हैं जिनका डिजाइन आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री), पेराम्बुर, चेन्नई, भारत द्वारा विकसित किया गया था. वहीं, एलएचबी कोच (LHB Coach) को जर्मनी के लिंक-होफमैन-बुश द्वारा तैयार किया गया, जिसके बाद से इसका निर्माण भारत में ही किया जा रहा है.


बता दें कि नीले रंग वाले कोच को ICF (Integral Coach Factory) कोच कहते हैं जबकि लाल रंग वाले कोच को  LHB (Linke Hofmann Busch) कहा जाता है। हालांकि वर्तमान में हल्के नीले रंग में भी एलएचबी कोच बनाए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल शताब्दी और हफसफर एक्सप्रेस में किया जा रहा है। ICF कोच के स्लीपर क्लास में 72 सीट होती हैं जबकि एसी-3 क्लास में 64 सीटें मौजूद होती हैं। जबकि LHB कोच ज्यादा लंबा होता हैं यही कारण है कि इसके स्लीपर में 80 सीट और थर्ड एसी कोच में 72 सीट होती हैं। 


नीले रंग वाले आईसीएफ कोच के निर्माण की शुरुआत 1952 में हुई थी। ये तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया जाता है। वहीं, लाल रंग वाले कोच  LHB को बनाने की शुरुआत साल 2000 में हुई थी। जिसे जर्मनी की कम्पनी लिंक हाफमेन बुश द्वारा डिजाईन किया गया था। LHB कोच रेल कोच कपूरथला में बनाया जाता है।


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